दिल्ली की रोहिणी जेल में कथित रंगदारी और रिश्वतखोरी के संगठित रैकेट से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने रोहिणी जेल के तीन अधिकारियों, एक अधिवक्ता और एक अन्य आरोपित को 31 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने माना कि आरोपितों को रिहा किए जाने पर वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन आरोपितों को भेजा गया न्यायिक हिरासत में
विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश की अदालत ने रोहिणी जेल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, बागपत निवासी अधिवक्ता हरेंद्र बंसल तथा दिल्ली निवासी विप्लव खारी को 31 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
अदालत ने क्यों जताई गंभीर चिंता?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त आधार मौजूद हैं। उनके प्रभावशाली पद और मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें रिहा करना जांच को प्रभावित कर सकता है। न्यायालय ने कहा कि आरोपित गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या जांच में बाधा डालने का प्रयास कर सकते हैं।
जांच का दायरा बढ़ने के संकेत
अदालत ने यह भी माना कि प्रारंभिक जांच से यह संभावना सामने आती है कि रोहिणी जेल के अन्य अधिकारी और कुछ बाहरी लोग भी कथित अवैध वसूली के नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। पूरे षड्यंत्र, धन के प्रवाह और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका उजागर करने के लिए विस्तृत जांच आवश्यक बताई गई है।
शिकायत से शुरू हुआ था पूरा मामला
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के अनुसार, यह मामला 9 फरवरी 2026 को मिली एक शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि रोहिणी जेल में बंद उसके पिता और भाई की सुरक्षा तथा सुविधाएं उपलब्ध कराने के बदले उससे धन की मांग की जा रही थी। शिकायत की पुष्टि के लिए एसीबी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की, जिसके दौरान एक लाख रुपये की कथित रिश्वत बरामद की गई। इसके बाद मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।
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