रोहतक। हरियाणा के रोहतक में महम विधानसभा क्षेत्र से इनेलो के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को 15 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट ने दोषी करार दिया है। बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ASJ) कपिल राठी की अदालत ने बाली पहलवान समेत 7 आरोपियों को दोषी ठहराया। वहीं, सबूतों के अभाव में एक आरोपी सज्जन सिंह को बरी कर दिया गया। कोर्ट गुरुवार को दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।
यह मामला 6 मई 2011 का है, जब कलानौर की अनाज मंडी में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद हुई गोलीबारी में निगाना निवासी विष्णु की मौत हो गई थी। विष्णु के रिश्तेदार और बसाना के तत्कालीन सरपंच सीताराम राठी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। FIR में बाली पहलवान समेत कुल 18 लोगों को नामजद किया गया था। मुकदमे के दौरान दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।
मंडी में विवाद के बाद हुई थी फायरिंग
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 6 मई 2011 को कलानौर अनाज मंडी में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। विवाद की वजह को लेकर उस समय अलग-अलग बातें सामने आई थीं। एक पक्ष के अनुसार, बाली पहलवान के कुछ साथी मंडी में पशु चारा लेने या चंदा मांगने पहुंचे थे, जहां उनकी तत्कालीन सरपंच एवं आढ़ती सीताराम राठी से कहासुनी हो गई।
वहीं दूसरी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बाली के साथियों ने सीताराम राठी से कथित तौर पर 5 लाख रुपये की प्रोटेक्शन मनी मांगी थी। विरोध करने पर सीताराम और उनके साले विनोद के साथ हाथापाई हुई और इसके बाद फायरिंग शुरू हो गई। गोलीबारी में विष्णु की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे।
बाली की गिरफ्तारी बनी थी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
मर्डर केस में नाम सामने आने के बाद बाली पहलवान की गिरफ्तारी उस समय पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी। तत्कालीन सरकार कांग्रेस की थी और मामला रोहतक से ही जुड़ा होने के कारण इस पर काफी राजनीतिक और सामाजिक हलचल हुई थी।
बाली की गिरफ्तारी रोकने के लिए उनके समर्थकों और ग्रामीणों की बड़ी भीड़ उनके मोखरा स्थित घर के आसपास जुट गई थी। बताया गया था कि 100 से अधिक लोग घर पर पहरा दे रहे थे। उस दौरान महिलाओं के हाथों में भी बंदूकें नजर आई थीं। हालात ऐसे थे कि पुलिस को भी कार्रवाई करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
तीन सप्ताह बाद भीड़ के साथ किया था सरेंडर
करीब तीन सप्ताह तक पुलिस के लिए चुनौती बने रहने के बाद बाली पहलवान ने 27 मई 2011 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। वह अकेले कोर्ट नहीं पहुंचे थे, बल्कि उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे। उस दौरान गाड़ी की छत पर खड़े होकर बाली ने समर्थकों को संबोधित किया था और खुद को निर्दोष बताया था।
मर्डर केस में गिरफ्तार होने के बाद बाली पहलवान करीब 7 साल तक जेल में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिली और जेल से बाहर आने पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था।
अब करीब 15 साल बाद अदालत ने बाली पहलवान समेत सात आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस फैसले के बाद गुरुवार को अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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