रोहतक में अग्निकांड के बाद सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने फायर ब्रिगेड की खस्ताहाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए बड़े मुआवजे और नौकरी की मांग की है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। रोहतक में हुए भीषण अग्निकांड में 3 लोगों की मौत और करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। Deepender Singh Hooda ने हरियाणा सरकार की अग्निशमन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि समय पर पर्याप्त संसाधनों के साथ सिस्टम सक्रिय होता तो तीन अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता था।

दीपेंद्र हुड्डा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय रोहतक फायर स्टेशन में 16 फायर ब्रिगेड वाहन तैनात थे, लेकिन भाजपा सरकार के करीब 12 वर्षों बाद यह संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 50% फायरमैन के पद खाली पड़े हैं, जबकि अग्निशमन कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया लगभग ढाई साल से लंबित है। हुड्डा ने कहा कि संसाधनों और स्टाफ की कमी भविष्य में ऐसे हादसों का खतरा बढ़ा सकती है।

सांसद ने पीड़ित परिवारों को घोषित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि यह “ऊंट के मुंह में जीरे के समान” है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतकों के परिजनों को एक-एक सरकारी नौकरी, पर्याप्त आर्थिक मुआवजा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए विशेष सहायता पैकेज दिया जाए।

हुड्डा ने सरकार से अग्निशमन विभाग में खाली पदों को भरने, फायर ब्रिगेड वाहनों की संख्या बढ़ाने और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की मांग करते हुए कहा कि रोहतक जैसी घटनाओं से सबक लेना जरूरी है, ताकि भविष्य में जान-माल का नुकसान रोका जा सके।