अनिल शर्मा, बराड़ा। गांव मनु माजरा के होनहार युवा सचिन ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर अपने गांव, क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया है। उन्हें शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, जम्मू ने एग्रोनॉमी विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की है। उनकी इस सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।
सचिन गांव मनु माजरा के निवासी हैं। उन्होंने अपना शोध कार्य जम्मू के वर्षा आधारित उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में गेहूं-मक्का फसल प्रणाली की उत्पादकता पर बायोचार एवं अकार्बनिक उर्वरकों के समन्वित उपयोग के प्रभाव विषय पर पूरा किया। यह शोध कार्य जम्मू के कृषि संकाय की एग्रोनॉमी डिवीजन के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. अरविंद प्रकाश सिंह के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
सचिन के शोध ने यह साबित किया कि बायोचार और अकार्बनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग वर्षा आधारित खेती में फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। शोध के अनुसार बायोचार मिट्टी में नमी बनाए रखने, पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा उर्वरकों की उपयोग दक्षता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे किसानों को कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
उनके अध्ययन में यह भी सामने आया कि बायोचार केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने, कार्बन संचयन को बढ़ावा देने तथा बंजर एवं क्षरित भूमि के पुनर्जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शोध में सुझाई गई तकनीक भविष्य की टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सचिन की इस उपलब्धि पर परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने कहा कि गांव का एक युवा राष्ट्रीय स्तर पर कृषि अनुसंधान में योगदान देकर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना है। सचिन की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी युवा अपनी मेहनत और लगन से देश-दुनिया में पहचान बना सकते हैं।

