विकास कुमार/सहरसा। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली की अघोषित कटौती से परेशान सहरसा जिले के ग्रामीणों का सब्र का बांध आखिरकार मंगलवार को टूट ही गया। बिजली विभाग की घोर लापरवाही और उदासीनता के विरोध में सुलिंदाबाद के समीप ग्रामीणों ने सहरसा-बख्तियारपुर मुख्य मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। यह प्रदर्शन करीब चार घंटे तक जारी रहा, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।

​बिजली विभाग के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

​प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का आरोप था कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में बिजली की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण न केवल घरों में अंधेरा है बल्कि पेयजल का संकट भी गहरा गया है। जलमीनारें नहीं चल पा रही हैं जिससे आमजन एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने विभाग पर आरोप लगाया कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।

​जनजीवन अस्त-व्यस्त, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित

​बिजली कटौती का सबसे बुरा असर स्कूली छात्रों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। उमस भरी गर्मी में छात्रों का पढ़ाई करना दूभर हो गया है वहीं छोटे व्यवसायियों का काम धंधा ठप पड़ा है। ग्रामीणों का कहना था कि भीषण गर्मी में बुजुर्गों और बच्चों का बुरा हाल है लेकिन विभाग सुध लेने को तैयार नहीं है। चार घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सहरसा-बख्तियारपुर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

​अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला जाम

​सड़क जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें बिजली आपूर्ति में जल्द सुधार का ठोस भरोसा दिलाया। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और समझाने-बुझाने के बाद ग्रामीण शांत हुए और उन्होंने सड़क जाम समाप्त किया। लगभग चार घंटे के संघर्ष के बाद यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे बहाल हो सकी।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यह महज एक सांकेतिक विरोध था। यदि बिजली आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार नहीं होता है, तो ग्रामीण आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय लोग अब खोखले आश्वासनों से थक चुके हैं और उन्हें धरातल पर समाधान चाहिए।