गुजरात के महिसागर जिले में चांदीपुरा वायरस का पहला संदिग्ध मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। कडाना तालुका के अकलिया गांव की एक 7 वर्षीय बच्ची की वडोदरा के सयाजी (SSG) अस्पताल में इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। बच्ची की हालत बिगड़ने पर उसे गंभीर स्थिति में महिसागर से वडोदरा रेफर किया गया था, जहां डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उसे नहीं बचाया जा सका।
इस दुखद घटना के बाद महिसागर का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से चांदीपुरा वायरस की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है और सैंपल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अकलिया गांव और आसपास के इलाकों में एहतियाती कदम तुरंत शुरू कर दिए गए हैं।
अकलिया गांव में सर्विलांस और डस्टिंग तेज़
वायरस के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की टीम अकलिया गांव में घर-घर जाकर गहन सर्विलांस कर रही है। सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) और कीटों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशक डस्टिंग और फॉगिंग का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
बच्चों के लिए बेहद घातक है यह वायरस
चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाता है। इसके संक्रमण से मस्तिष्क में सूजन आ जाती है, जिसे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) कहा जाता है। चूंकि इस वायरस के खिलाफ कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसके लक्षणों—जैसे तेज बुखार, उल्टी, ऐंठन और बेहोशी—के दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में इलाज शुरू कराना बेहद जरूरी है।
राज्य में चांदीपुरा के संदिग्ध मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, अपने आसपास सफाई रखें और बच्चों को मक्खियों व मच्छरों के काटने से बचाएं।
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