संयुक्त किसान मोर्चा भिवानी के नेतृत्व में किसानों ने विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग को लेकर सांसद धर्मबीर के कैंप ऑफिस का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सांसद की अनुपस्थिति में उनके सुपुत्र मोहित चौधरी को ज्ञापन सौंपा।

भिवानी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, इंग्लैंड व न्यूजीलैंड के साथ गैर-बराबरी के आधार पर किए जा रहे व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग को लेकर शुक्रवार को भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद धर्मबीर के कैंप ऑफिस का घेराव किया गया। इस संबंध में किसानों ने सांसद धर्मबीर की ओर से उनके सुपुत्र मोहित चौधरी को ज्ञापन सौंपा।

इससे पहले किसान चौधरी छोटूराम चौक पर एकत्रित हुए और एक सभा की। इसकी अध्यक्षता किसान सभा के रामफल देशवाल, एआईकेकेएमएस के रोहताश सैनी, भारतीय किसान यूनियन नैन ग्रुप, किसान मजदूर यूनियन के राजकुमार हड़ोदी व स्वराज किसान मोर्चा के युद्धवीर खरेटा ने संयुक्त रूप से की। मंच का संचालन किसान सभा के मास्टर जगरोशन व मास्टर बस्तीराम ने संयुक्त रूप से किया।

व्यापार समझौतों का कड़ा विरोध

सभा व घेराव को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य महासचिव सुमित दलाल, जिला उप प्रधान कामरेड ओम प्रकाश, रोहताश सैनी व धर्मपाल बड़ाला ने बताया कि भारत सरकार जो स्वतंत्र व्यापार समझौते अमेरिका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड व यूरोपियन यूनियन से कर रही है, वे गैर-बराबरी के आधार पर कर रही है। उन देशों में मुट्ठी भर लोग बड़े पैमाने पर खेती व दुग्ध उत्पादन कर रहे हैं और उनको वहां की सरकारें अरबों डॉलर सब्सिडी दे रही हैं।

दूसरी ओर हमारे देश में 86 प्रतिशत लोग पांच एकड़ से कम जमीन के मालिक हैं, जो व्यवसाय करने की बजाय जीविकोपार्जन के लिए खेती करते हैं। इनको मामूली सब्सिडी मिलती है, इसलिए वे उन देशों के आयातित माल का मुकाबला नहीं कर सकते। इन समझौतों के तहत जो माल खुले रूप में भारत में आएगा, उससे हमारी खेती चौपट हो जाएगी और छोटे तथा लघु उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।

नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार बड़ी अंतरराष्ट्रीय पूंजी और भारत के कॉरपोरेट पूंजी के दबाव में आकर जनता पर ये समझौते थोप रही है। इससे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट जाएगी, जो देश की संप्रभुता पर हमला है।

छात्र आंदोलन का किया समर्थन

किसान संगठनों ने छात्र आंदोलन को समर्थन देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने, गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने, पीड़ित परिवारों को न्यायोचित मुआवजा देने के साथ एनटीए को भंग करने की मांग की। साथ ही भविष्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने की बात कही।

स्थानीय कृषि समस्याओं पर मांगें

किसानों ने पर्याप्त मात्रा में उर्वरक आपूर्ति देने, नहरों में 42 दिनों में एक सप्ताह पानी की आपूर्ति बहाल करने, बिजली टावरों का न्यायोचित मुआवजा देने, बकाया ट्यूबवेल कनेक्शन देने व बिजली निजीकरण तथा स्मार्ट मीटर योजना रद्द करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन व सभा को संबोधित करने वालों में किसान नेता सूबेदार धनपत, कविता आर्य, कमल प्रधान, कर्ण सिंह जैनावास, मास्टर उमराव सिंह, संतोष देशवाल, सीटू नेता सुखदेव पालवास, छोटूराम पूनिया, मास्टर शेर सिंह, रामकिशन भाकर व रामोतार बलियाली भी शामिल रहे।