Bihar News: जन सुराज के सूत्रधार और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पटना पुलिस प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि आगामी चुनावों से ठीक पहले उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस कारण के पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। प्रशांत किशोर के इन आरोपों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की प्रतिक्रिया सामने आई है।

संजय सरावगी का पीके पर पलटवार

संजय सरावगी ने इन आरोपों पर कहा कि, जो काम प्रशांत किशोर करते हैं, वो आरोप दूसरे पर लगाते हैं। बाहर के लोगों को लाकर, पैसा का अंधाधुंध वितरण करके, कानून भंग करके, चुनाव के एक दिन पहले, दो-दो, तीन-तीन घंटे जाकर थाना पर बाहर के लोगों के साथ बैठकर क्या करते थे? क्या अधिकार है चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद बाहर के लोगों को लेकर घूम रहे हैं? थाने पर जो जा रहे हैं, आप देखें वीडियो कैमरा, आप लोग खुद दिखा रहे हैं, बाहर के लोग वहां बैठे हैं।

विपक्ष ने उड़ाया सनातन संस्कृति का उपहास

वहीं, विपक्ष के नेताओं और सांसदों पर दायर एफआईआर पर भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि, पप्पू यादव, राहुल गांधी, विपक्ष के नेताओं ने सनातन संस्कृति का उपहास उड़ाया, हिंदू संस्कृति का उपहास उड़ाया। जिस तरह साधु-महात्मा का उपहास उड़ाया, ये किसी भी हालत में भारत के लोग बर्दाश्त नहीं कर सकते।

परिसीमन को लेकर कही ये बात

परिसीमन को लेकर राहुल गांधी के बयान पर उन्होंने कहा कि, जब संसद में बहस हो रही थी, तो भारत की सरकार ने उस बहस के जवाब में कहा था कि नहीं, बराबर-बराबर हम वितरण करेंगे। किसी भी राज्य के साथ गलत नहीं होगा। अब जब दक्षिण भारत के राज्यों को लग रहा है कि नहीं, हमें भी बराबर की सीट मिलने वाली है, तब राहुल गांधी का पैतरा बदलना है । जब दक्षिण भारत के राज्यों को लगता है कि नहीं, हमारी भी सीटें बढ़ेंगी, तो उन लोगों का सकारात्मक भाव… तब इनका पैतरा बदलना है।

फारूक अब्दुल्ला के बयान के बयान पर जताई आपत्ती

वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बयान पर संजय सरावगी ने कहा कि, अतिनिंदनीय है, जो कृत्य हुआ है। नाम पूछकर गोली मार दी गई। एक की तो स्थल पर ही मौत हो गई, दूसरे की बाद में इलाज के दौरान मौत हुई है। ये कहीं से भी उचित नहीं है। भारत की सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। लेकिन फारूक अब्दुल्ला ने जो कहा है, ये गलत है। वो किस ओर से ऐसा इशारा करना चाहते हैं?

दरअसल फारूक अब्दुल्ला ने घटना को लेकर सवाल उठाया कि अगर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म हो चुका है, तो ऐसे हमले कौन कर रहा है? उन्होंने यह भी कहा कि, हर बार जब जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तेज होती है, उसी दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।

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