भिवानी के हनुमान ढाणी स्थित हनुमान जोहड़ी मंदिर में संत शिरोमणि कबीरदास महाराज के प्रकट दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान समाज सुधार में संत कबीर के योगदान को याद करते हुए आगामी 29 जून को मंदिर परिसर में संत कबीर कुटीर साधना व सत्संग भवन के भूमि पूजन की घोषणा की गई।

अजय सैनी, भिवानी। संत शिरोमणि कबीरदास महाराज के पावन प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में युवा जागृति एवं जनकल्याण मिशन ट्रस्ट के बैनर तले स्थानीय हनुमान ढाणी स्थित हनुमान जोहड़ी मंदिर में एक विशेष कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। मंदिर के महंत बालयोगी महंत चरणदास महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने संत शिरोमणि कबीरदास महाराज के चित्र पर श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित किए।

इसके साथ ही सभी उपस्थित लोगों ने संत कबीर की महान शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन में आत्मसात कर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प लिया, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार

इस विशेष अवसर पर बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संत परंपरा के अद्वितीय हस्ताक्षर संत कबीरदास महाराज ने अपने कालजयी दोहों व रचनाओं से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पुरजोर जनजागरण किया और समाज को एक नई प्रगतिशील दिशा देने का ऐतिहासिक काम किया।

संत कबीरदास ने हमेशा रूढ़िवादी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अडिग रहते हुए आम जनमानस में शिक्षा को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में भी संत कबीरदास महाराज के दोहों के माध्यम से कोई भी व्यक्ति जीवन जीने की सही और सच्ची राह को बेहद आसानी से पा सकता है।

कबीर कुटीर का भूमि पूजन

महंत चरणदास महाराज ने आगे कहा कि संत कबीरदास ने न केवल सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आजीवन लड़ाई लड़ी, बल्कि पूरी दुनिया को मानवता और आपसी प्रेम का सच्चा पाठ भी पढ़ाया। उन्होंने कार्यक्रम में घोषणा करते हुए बताया कि संत शिरोमणि कबीरदास महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में 29 जून को हनुमान जोहड़ी मंदिर परिसर में ‘संत कबीर कुटीर साधना व सत्संग भवन’ का भव्य भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

इस मांगलिक अवसर पर बंटी गोयल, राकेश कौशिक, अधिवक्ता रमेश शर्मा, प्रेम शर्मा, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर कमलेश यादव, कुलदीप जेवली, डॉ. ओमबीर कौशिक, नाथुराम, राधा, रेणु, लीलावती, बिंदी, आशुतोष, विक्रम कांगड़ा सहित अनेक श्रद्धालु मुख्य रूप से मौजूद रहे।