बीजेपी विधायक पवन खरखौदा और रणधीर पनिहार ने सोनीपत के सतलोक आश्रम में संत रामपाल से मुलाकात की। विधायकों ने अपनी जीत का श्रेय रामपाल को दिया है।
सोनीपत। जिले के धनाना स्थित सतलोक आश्रम में इन दिनों नेताओं का तांता लगा हुआ है। जेल से बाहर आने के बाद संत रामपाल का यह आश्रम राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में बीजेपी के दो विधायक, खरखौदा से पवन खरखौदा और नलवा से रणधीर पनिहार, संत रामपाल से मिलने पहुंचे। मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों विधायक संत रामपाल के सामने नतमस्तक होते हुए दिखाई दे रहे हैं। विधायक अपनी चुनावी जीत का श्रेय संत रामपाल के आशीर्वाद को दे रहे हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा छिड़ गई है।
जीत के बाद आशीर्वाद लेने पहुंचे विधायक
वायरल वीडियो में बीजेपी विधायक पवन खरखौदा ने संत रामपाल के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि इस बार संत रामपाल के आशीर्वाद से ही खरखौदा सीट पर पहली बार कमल खिला है। विधायक ने आश्रम को अपना ‘पहला धाम’ बताते हुए जीत का पूरा श्रेय संत रामपाल को दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संत रामपाल ने कहा कि चाहे विधायक बनवाना हो या अन्य कोई कार्य, सबकी चाबी उनके पास ही है। उनके इस दावे के बाद विधायक ने संत के चरणों में दंडवत होकर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया।
नाम दीक्षा पर क्या बोले रामपाल
वहीं, नलवा से बीजेपी विधायक रणधीर पनिहार ने भी संत रामपाल के प्रति अपनी गहरी निष्ठा प्रकट की और जीत का श्रेय उन्हें दिया। जब विधायक ने संत से ‘नाम’ लेने की इच्छा जताई, तो रामपाल ने उनसे पहले आश्रम के नियमों और शर्तों को समझने की बात कही। उन्होंने कहा कि आश्रम में नाम लेना स्कूल में दाखिला लेने जैसी प्रक्रिया है। जब विधायक ने समय मांगा, तो संत रामपाल ने स्पष्ट किया कि ये कार्य उनके शिष्य संभालते हैं। इस मुलाकात और रामपाल के बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि लोग इसे विधायक बनवाने की चाबी से जोड़कर देख रहे हैं।

