अनिल सक्सेना, रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय के सांची ब्लॉक से अवैध उत्खनन और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां के ग्राम सरार के सरपंच नरेश चौधरी पर ग्राम बरजोरपुर में दिनदहाड़े अवैध रूप से उत्खनन और परिवहन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे हो रहे इस अवैध खेल पर खनिज विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन अपनी आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है।
तालाब निर्माण की आड़ में 30 फीट गहरा जानलेवा खेल
जानकारी के मुताबिक ग्राम सरार के रसूखदार सरपंच नरेश चौधरी द्वारा ग्राम बरजोरपुर में सड़क के बिल्कुल किनारे अवैध रूप से गड्ढे खोदे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब तालाब निर्माण के नाम पर किया जा रहा है लेकिन इन गड्ढों की गहराई 30 फीट से भी अधिक कर दी गई है। सड़क के ठीक किनारे इतने गहरे और खुले गड्ढे किसी भी बड़ी अनहोनी के लिए काफी है। रसूखदार सरपंच खुद को प्रशासन से भी ऊपर मानते हुए खनिज विभाग को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहा है और धड़ल्ले से अवैध उत्खनन व परिवहन में जुटा है।
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले को लेकर जब रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से बात की गई तो उन्होंने पारंपरिक ढर्रे पर ‘जांच कराकर उचित कार्रवाई करने’ का आश्वासन तो दिया लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कार्रवाई के नाम पर अब तक फाइल आगे नहीं बढ़ी है। रसूखदार सरपंच की जेसीबी और डंपर आज भी चल रहे हैं।
गैरतगंज हादसे से भी नहीं लिया सबक, क्या फिर डूबेगी किसी की जिंदगी?
इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी कुछ ही दिनों पहले रायसेन के ही गैरतगंज के गढ़ी के पास एक गांव में तीन बच्चियों की अवैध रूप से बने गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। इस बड़ी त्रासदी के बाद भी सांची ब्लॉक का प्रशासनिक अमला नींद से नहीं जागा है। सवाल यह उठता है कि क्या खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन बरजोरपुर के इन 30 फीट गहरे गड्ढों में भी किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहा है?
राहगीरों और बच्चों पर मंडरा रहा मौत का साया
सड़क किनारे खोदे गए इन जानलेवा गड्ढों की वजह से स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश और डर का माहौल है। रात के अंधेरे में या दिन के वक्त भी अगर कोई वाहन चालक या मासूम बच्चा अनियंत्रित होकर इन गड्ढों में गिर जाता है, तो उसकी जान बचना नामुमकिन है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि अगर यहां कोई हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? वह भ्रष्ट सिस्टम जो आंखें मूंदे बैठा है या वह रसूखदार सरपंच जो कानून को ठेंगा दिखा रहा है?

