अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। जिले के चेनारी थाना क्षेत्र अंतर्गत डोईया गांव में एक सरकारी स्कूल का भवन किसी और की नहीं, बल्कि एक निजी जमीन पर खड़ा कर दिया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी की शुरुआती जांच में इस बात का आधिकारिक तौर पर खुलासा हुआ है। इस अनोखे विवाद के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

​कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

​यह पूरा मामला तब तूल पकड़ा जब राजकीय मध्य विद्यालय डोईया के परिसर और कमरों का इस्तेमाल अवैध रूप से मवेशी बांधने और भूसा-चारा रखने के लिए किए जाने की शिकायत सामने आई। स्कूल के कमरों में मवेशियों का गोबर और भूसा भरे होने के कारण बच्चे लगातार दुर्गंध और असहज माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर थे। इस गंभीर लापरवाही को देखने के बाद जिला प्रशासन ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी।

​जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

​प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। पता चला कि वर्ष 2003 में लालजी यादव नामक व्यक्ति की निजी जमीन पर इस विद्यालय के भवन का निर्माण करवा दिया गया था। उस दौरान प्रशासन या ग्रामीणों की ओर से यह मौखिक या कागजी समझौता हुआ था कि लालजी यादव को उनकी इस जमीन के बदले गांव में ही दूसरी जगह जमीन दी जाएगी। हालांकि, यह वादा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया और जमीन के असली मालिक को कभी भी उस वैकल्पिक जगह पर कब्जा नहीं दिलाया गया।

​मालिक के पहाड़ जाने का उठाया गया फायदा

​स्थानीय लोगों के अनुसार, जमीन के मालिक लालजी यादव पेशे से मवेशी पालक हैं। जब वे अपने मवेशियों को लेकर तीन-चार महीने के लिए पहाड़ पर चले गए थे, तब उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए गांव के दो लोगों ने मिलकर उनकी निजी जमीन पर विद्यालय का भवन खड़ा करवा दिया। समय बीतता गया और जब पिछले दो सालों से लालजी यादव के पुत्र सोनू यादव को अपनी पुश्तैनी जमीन का हक नहीं मिला, तो उन्होंने स्कूल की जमीन पर अपना दावा ठोक दिया और परिसर में मवेशी बांधने शुरू कर दिए।

​जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की प्रतिक्रिया

​मामला तूल पकड़ने के बाद स्थानीय विधायक मुरारी प्रसाद गौतम ने खुद स्कूल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जमीन के असली मालिक को उचित न्याय दिलाते हुए उनके हिस्से की वैकल्पिक जमीन पर जल्द कब्जा दिलवाने का आश्वासन दिया। वहीं, रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि इस मामले को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई है, जिसमें इस समस्या के जल्द और स्थायी समाधान पर मुहर लगाई गई है ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को इस परेशानी से मुक्ति मिल सके।