​सासाराम। एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) विमल कुमार हत्याकांड में पुलिस पूछताछ के दौरान उनके ड्राइवर मिथिलेश कुमार ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। आरोपी ने बताया कि छुट्टी न मिलने और लगातार प्रताड़ित किए जाने के तनाव में उसने इस वारदात को अंजाम दिया था। इस पूरे मामले की जांच के लिए प्रशासन ने एक विशेष टीम का गठन कर दिया है।

​ड्राइवर का कबूलनामा: रॉड से हमला और फिर गाड़ी चढ़ाई

​घटना के दिन विमल कुमार और ड्राइवर मिथिलेश डेहरी से पटना के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में टॉयलेट जाने के लिए गाड़ी रोकने की बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। गुस्से में आकर मिथिलेश ने बारुण-दाउदनगर नहर रोड पर वाहन रोक दिया।
​इसके बाद उसने डिक्की खोलने वाली लोहे की रॉड से EO के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वे बेहोश हो गए। इसके बाद आरोपी ने उनके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी और शव को गाड़ी में रखकर सड़क के बाईं ओर स्थित गड्‌ढे में लुढ़का दिया। पुलिस ने ड्राइवर की निशानदेही पर नहर के पास से हत्या में इस्तेमाल रॉड भी बरामद कर ली है।

​पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: गंभीर आंतरिक चोटों से हुई मौत

​सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि EO विमल कुमार की मौत ‘हार्ड एंड ब्लंट इंजरी’ के कारण हुई है। उनके शरीर पर किसी भी तरह के धारदार हथियार या गोली के निशान नहीं मिले हैं।
​हालांकि, पोस्टमॉर्टम में मल्टीपल इंजरी की पुष्टि हुई है। मृतक की गर्दन और सीने की आठ से ज्यादा हड्डियां टूटी पाई गईं। इसके अलावा फेफड़े, लिवर और ब्लैडर जैसे महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों में गंभीर चोट लगने से भारी ब्लीडिंग हुई, जिससे वे शॉक में चले गए और उनकी मौत हो गई।

​पत्नी के बयानों में विरोधाभास और मुआवजे की मांग

​मृतक की पत्नी बबीता ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए गजेटेड नौकरी और 8 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि घर की ईएमआई और बच्चों के महंगे खर्चों को अकेले संभालना मुश्किल है।
​दूसरी ओर, एक रिटायर्ड अधिकारी ने पत्नी के बयानों में भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं। घटना के पहले दिन उन्होंने डेहरी विधायक पर पैसों के लिए प्रताड़ित करने और रंगदारी मांगने के गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन, बाद में दर्ज कराई गई एफआईआर और मीडिया साक्षात्कारों में उन्होंने इन बातों का जिक्र नहीं किया और ड्राइवर मिथिलेश पर ही पूरा भरोसा जताया।

​जांच के लिए 7 सदस्यीय SIT गठित

​मामले की गंभीरता को देखते हुए मगध रेंज के आईजी विकास वैभव के निर्देश पर औरंगाबाद एसपी के नेतृत्व में 7 सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी तकनीकी साक्ष्य जैसे मोबाइल लोकेशन, सीडीआर और आईपीआर जुटाने में लगी है। पुलिस संदिग्धों से पूछताछ के साथ संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है।