अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। बिहार के रोहतास जिले के संझौली थाना क्षेत्र अंतर्गत तिलई गांव में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शराब तस्करी के खिलाफ अभियान चलाने गई पुलिस टीम पर स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर महादलित महिलाओं ने मारपीट और अभद्रता करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत तब हुई जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि तिलई गांव में कुछ लोग अवैध शराब की बिक्री कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर संझौली थाना पुलिस ने गांव में दबिश दी। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी महिला कांस्टेबल की मौजूदगी के उनके घरों में प्रवेश किया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। महिलाओं का दावा है कि पुलिस के पुरुष जवानों ने उन्हें लाठी-डंडों से पीटा, जिससे कई महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घर में तोड़फोड़ और उत्पीड़न का आरोप
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने न केवल उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उनके घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ भी की। आरोप है कि पुलिस ने घर के बर्तन, बक्से और अन्य कीमती सामानों को चकनाचूर कर दिया, जिससे गरीब परिवारों का भारी नुकसान हुआ है। मारपीट से घायल कई महिलाएं इलाज के लिए सासाराम के सदर अस्पताल पहुंचीं, जहां उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है।
स्थानीय सांसद ने जताई कड़ी नाराजगी
इस घटना ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। काराकाट के स्थानीय सांसद राजाराम सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे पुलिसिया बर्बरता करार देते हुए कहा कि बिना किसी ठोस जांच के महादलित महिलाओं के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने घटना की घोर निंदा की और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पीड़ित महिलाओं ने शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, रोहतास के पुलिस अधीक्षक (SP) ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बिक्रमगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) को पूरे घटनाक्रम की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई भी ठोस कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल, पूरा गांव दहशत में है और पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

