प्रमोद कुमार/कैमूर। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को एक बार फिर अपनी सादगी और संवेदना का परिचय दिया। वे पटना से कैमूर की लंबी यात्रा किसी वीआईपी हवाई सुविधा से नहीं, बल्कि सड़क मार्ग से तय करके चैनपुर के नौघड़ा गांव पहुंचे। यह दौरा किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से व्यक्तिगत था। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान की माताजी की अचानक तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही नीतीश कुमार उनके आवास पर पहुंच गए।
जनता में दिखी मायूसी
पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही इलाके में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हालांकि, नीतीश कुमार ने यहां किसी भी प्रकार का सार्वजनिक संबोधन नहीं किया। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने कहा कि वे उन्हें सुनने के लिए बड़ी उम्मीद से आए थे, क्योंकि बिहार के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है। संबोधन न होने से लोगों में मायूसी देखी गई।
वे मेरे अभिभावक हैं: मंत्री जमा खान
इस भावुक क्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री मोहम्मद जमा खान ने कहा कि नीतीश कुमार का आना मेरे परिवार के लिए बड़ा संबल है। उन्होंने कहा, वे सिर्फ हमारे नेता नहीं, बल्कि मेरे अभिभावक हैं। वे मेरे घर आए और मेरी मां का हाल जाना, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई पूर्व निर्धारित राजनीतिक दौरा नहीं था, इसलिए उन्होंने जनता को संबोधित नहीं किया। वे केवल एक अभिभावक के तौर पर पारिवारिक आत्मीयता निभाने आए थे।
विकास कार्यों की समीक्षा
मुलाकात के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने मंत्री जमा खान से कैमूर (चैनपुर विधानसभा) में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की स्थिति के बारे में भी पूछा। जमा खान ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन सभी योजनाओं का कार्य धरातल पर सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है, जिन्हें मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी थी।
अंत में जमा खान ने कहा कि नीतीश कुमार का बिहार के प्रति प्रेम और जनता का उनके प्रति सम्मान अटूट है। जिस तरह से बिहार को विकास के नए सोपान पर नीतीश कुमार ने खड़ा किया है, उसके लिए राज्य की जनता हमेशा उनकी आभारी रहेगी।

