अविनाश श्रीवास्तव/​सासाराम। बिहार के रोहतास जिले के मुख्य सासाराम रेलवे स्टेशन बीती रात यात्रियों के बीच जमकर उपद्रव देखने को मिला। ट्रेन के अंदर सीट को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद स्टेशन पहुंचते-पहुंचते हिंसक झड़प में बदल गया। युवकों की दो विरोधी टोलियों के बीच हुई इस मारपीट के बाद रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म संख्या-6 कुछ देर के लिए किसी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। इस घटना का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें युवकों को खुलेआम एक-दूसरे पर लात-घूंसों और बेल्ट से हमला करते हुए साफ देखा जा सकता है।

​सीट विवाद से शुरू हुआ था पूरा घटनाक्रम

​मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेन यात्रा के दौरान कुछ युवकों के बीच बैठने की जगह यानी सीट को लेकर किसी बात पर कहासुनी और नोंकझोंक शुरू हो गई थी। हालांकि, उस दौरान ट्रेन में मामला किसी तरह संभल गया, लेकिन जैसे ही संबंधित ट्रेन सासाराम रेलवे स्टेशन पर रुकी और ये युवक नीचे उतरे, पुरानी बात को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि प्लेटफॉर्म पर ही गाली-गलौज और हाथापाई शुरू हो गई।

​प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर मची अफरा-तफरी

​सासाराम रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-6 पर जब युवकों की दोनों टोलियों ने एक-दूसरे पर बेल्ट और लात-घूंसों से हमला करना शुरू किया, तो वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। इस अचानक हुई हिंसा से वहां से गुजर रहे सामान्य यात्री और महिलाएं बुरी तरह सहम गए। इस दौरान यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मारपीट की इस अप्रत्याशित घटना के कारण कुछ पलों के लिए रेलवे परिसर में भय और असहजता का माहौल बन गया जिससे कई यात्री ट्रेन पकड़ने की जल्दी के बीच अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।

​रेलवे पुलिस के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला

​प्लेटफॉर्म पर हंगामा बढ़ता देख वहां मौजूद अन्य यात्रियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। इसी बीच, मौके पर मुस्तैद कुछ रेल पुलिसकर्मी भी तुरंत हरकत में आ गए। यात्रियों और पुलिस बल के संयुक्त हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के उग्र युवकों को शांत कराया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। गनीमत यह रही कि इस हिंसक झड़प में किसी भी युवक या यात्री को कोई गंभीर चोट नहीं आई है, जिससे एक बड़ा हादसा या बड़ी कानूनी उलझन टल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया, जिसके बाद दोनों गुट वहां से तितर-बितर हो गए। इस घटना ने एक बार फिर ट्रेनों और स्टेशनों पर बढ़ती अनुशासनहीनता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।