अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। ऐतिहासिक शहर सासाराम में इन दिनों आम जनजीवन और यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सड़क पर लगने वाले भीषण जाम ने स्थानीय लोगों, स्कूल जाने वाले बच्चों और व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए शहर का औचक निरीक्षण किया और जाम के मुख्य कारणों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है।
जाम से निजात के लिए उच्च स्तरीय बैठक
जिलाधिकारी ने यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में पुलिस प्रशासन, नगर निगम और पथ निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जाम केवल एक समस्या नहीं, बल्कि शहर के विकास में बाधा है। उन्होंने कहा कि बैठक में जाम के लिए जिम्मेदार सभी बिंदुओं जैसे अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और यातायात नियमों की अनदेखी पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और दोषी तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
बाईपास बनेगा गेम चेंजर
शहर में लगने वाले जाम का सबसे बड़ा कारण बड़े वाहनों (ट्रकों और भारी मालवाहक) का शहर के बीच से गुजरना है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि निर्माणाधीन बाईपास परियोजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। बाईपास के चालू हो जाने के बाद, शहर के अंदर से भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो जाएगा, जिससे मुख्य सड़कों पर दबाव 80% तक कम होने की उम्मीद है।
ढांचागत सुधार और चिन्हित स्थल
जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि शहर के जिन-जिन चौराहों और संकरी गलियों में अक्सर जाम की स्थिति बनती है, उन्हें ‘चिन्हित’ किया जा रहा है। इन स्थानों पर जरूरी इंजीनियरिंग सुधार किए जाएंगे, चाहे वह सड़क चौड़ीकरण हो, रोटरी का निर्माण हो या साइन बोर्ड लगाना। प्रशासन की योजना है कि शहर की यातायात व्यवस्था को तकनीक और बेहतर प्रबंधन से लैस किया जाए।
आम जनता ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई है कि यह कवायद केवल फाइलों तक सीमित न रहकर जल्द ही धरातल पर उतरेगी। फिलहाल, सासाराम प्रशासन की यह पहल शहरवासियों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।

