9 Public Sector Banks Merger Fact Check: सोशल मीडिया पर इन दिनों सरकारी बैंकों के विलय से जुड़ा एक दस्तावेज तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने 9 सरकारी बैंकों यानी पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) को तीन बड़े बैंकों में एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा (SBI, PNB, Bank of Baroda) मिलाने का फैसला किया है। हालांकि अब केंद्र सरकार ने इस दावे को फर्जी बताया है। PIB Fact Check ने इस वायरल दस्तावेज की जांच के बाद इसे फर्जी बताया है। PIB Fact Check के अनुसार यह दस्तावेज वित्त मंत्रालय ने जारी नहीं किया है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली ऐसी खबरों पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी सरकारी फैसले की जानकारी के लिए आधिकारिक और भरोसेमंद स्रोतों को ही देखें।
दरअसल वायरल डाक्यूमेंट्स को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी सरकारी गजट बताया जा रहा था। वायरल नकली गैजेट में दावा किय़ा गया था कि इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को मिलाकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाया जाएगा, जिससे SBI ग्रुप बनेगा।
दो पेज के डॉक्यूमेंट को “(डॉ. एम. पी. शर्मा), भारत सरकार के जॉइंट सेक्रेटरी” का बताया गया था। कथित नोटिफिकेशन को मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस के डिपार्टमेंट ऑफ़ फाइनेंशियल सर्विसेज़ से भारत के एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी गजट डॉक्यूमेंट के तौर पर फॉर्मेट किया गया था। इस पर तारीख 15 सितंबर, 2026, F. No. 10/03/2026-BO.I और G.S.R. 612(E) थी। डॉक्यूमेंट में दावा किया गया था कि अमालगमेशन ऑफ़ पब्लिक सेक्टर बैंक्स स्कीम, 2026” को बैंकिंग कंपनीज़ (एक्विजिशन एंड ट्रांसफर ऑफ़ अंडरटेकिंग्स) एक्ट, 1970 और उससे जुड़े 1980 एक्ट के सेक्शन 9 के तहत, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से सलाह के बाद प्रपोज़ किया गया था।
इन बैंकों के विलय का दावा
नकली गजट के मुताबिक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को मिलाकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाया जाएगा, जिससे SBI ग्रुप बनेगा। इसी तरह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में मिलाने का दावा किया गया था। वहीं केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मिलाने की बात वायरल डाक्यूमेंट्स में कही गई थी। इसमें यह भी दावा किया गया कि एसेट्स, लायबिलिटीज, अधिकार, दावे और जिम्मेदारियां संबंधित एक्वायरिंग बैंकों को ट्रांसफर कर दी जाएंगी। कर्मचारियों से सर्विस जारी रखने का दावा किया गया, जबकि कस्टमर अकाउंट और बैंकिंग अरेंजमेंट वैलिड रहेंगे।

PIB फैक्ट चेक में फर्जी निकला सरकारी गजट
PIB ने कथित गजट का फैक्ट चेक करने के बाद कहा कि यह फाइनेंस मिनिस्ट्री का ऑफिशियल नोटिफिकेशन नहीं है। PIB Fact Check के अनुसार यह दस्तावेज वित्त मंत्रालय ने जारी नहीं किया है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली ऐसी खबरों पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी सरकारी फैसले की जानकारी के लिए आधिकारिक और भरोसेमंद स्रोतों को ही देखें। फिलहाल ग्राहकों को इस खबर की वजह से अपने बैंक खाते, जमा पैसे या बैंकिंग सेवाओं को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।
पहले भी हो चुका है सरकारी बैंकों का विलय
बता दें कि सरकार ने पहले भी कई सरकारी बैंकों का विलय किया है। अप्रैल 2020 से लागू बड़े बैंक विलय के तहत 10 सरकारी बैंकों को 4 बैंकों में मिलाया गया था। इसमें ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का PNB में, सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय शामिल था।
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