Business Desk – सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल पंपों के नोजल पर पेट्रोल में मिली Ethanol की मात्रा यानी प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखने की मांग वाली याचिका सोमवार, 31 अगस्त को खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस मामले में वह संबंधित सक्षम अथॉरिटी के सामने अपनी मांग रख सकता है। याचिका में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

गाड़ियों की Compatibility बताने की थी मांग
याचिकाकर्ता ने सरकार से एक आधिकारिक और सार्वजनिक Online Compatibility Database बनाने की मांग की थी। इसमें वाहन कंपनी, मॉडल, इंजन के प्रकार और गाड़ी के निर्माण वर्ष के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया था। इससे वाहन मालिक यह पता कर सकें कि उनकी गाड़ी E20 या दूसरे Ethanol-Blended Fuel के इस्तेमाल के लिए कितनी उपयुक्त है।
E20 के असर की जांच के लिए Expert Committee का सुझाव
याचिका में E20 पेट्रोल के वास्तविक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक Expert Committee बनाने की मांग भी की गई थी। प्रस्तावित समिति में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS के प्रतिनिधियों के साथ स्वतंत्र Automobile Engineers को शामिल करने का सुझाव दिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि समिति सड़कों पर चल रहे अलग-अलग उम्र और मॉडल के वाहनों पर E20 ईंधन के प्रभाव का अध्ययन करे और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
Mileage और Engine Life पर असर का आकलन
याचिका में समिति से यह भी जांच कराने की मांग की गई थी कि Ethanol-Blended Petrol का वाहनों के Mileage, Engine Life और Maintenance Cost पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही ईंधन के इस्तेमाल से वाहन की Warranty और Insurance Claims पर पड़ने वाले संभावित असर का भी अध्ययन करने की मांग की गई थी।
Environment और Food Security का मुद्दा भी उठाया
याचिका में E20 के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने की मांग भी की गई थी। इसमें वाहनों से होने वाले Emissions और Ethanol के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली पानी की मात्रा का आकलन शामिल था। इसके अलावा अनाज और गन्ने को Ethanol उत्पादन के लिए इस्तेमाल किए जाने से Food Security और पशु चारे पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की जांच की मांग भी की गई।
पुरानी गाड़ियों को लेकर क्यों उठी चिंता?
E20 ईंधन में पेट्रोल के साथ 20% तक Ethanol मिलाया जाता है। याचिका में चिंता जताई गई थी कि पुराने वाहन इस तरह के ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल न होने पर उनके Mileage, Engine Components और रखरखाव पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से वाहन मालिकों को यह जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी कि उनका वाहन किस तरह के Ethanol-Blended Fuel के लिए उपयुक्त है।
SC ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मांग पर कोई निर्देश जारी करने के बजाय याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता को संबंधित सक्षम अथॉरिटी के पास जाने को कहा। यानी पेट्रोल पंपों पर Ethanol प्रतिशत लिखने या वाहनों की Compatibility का आधिकारिक Database बनाने को लेकर कोर्ट ने इस याचिका के जरिए कोई व्यवस्था तय नहीं की है।


