चंडीगढ़। स्कॉलरशिप घोटाले से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने मंगलवार को पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर अंसतोष जताया और चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत पेश होने के आदेश दिए। चीफ जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि या चीफ सेक्रेटरी को सही जानकारी नहीं दी गई या फिर उन्हें गलत सलाह देकर गुमराह किया गया। अब अगली सुनवाई 13 मई को होगी।
कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब 2020 अथवा कम से कम 2023 तक संज्ञेय अपराध की जानकारी प्रशासन को थी तो फिर एफआईआर दर्ज करने में 15 अप्रैल तक की देरी क्यों हुई। चीफ सेक्रेटरी खुद उपस्थित होकर बताएंगे कि आखिर किस आधार पर यह माना गया कि पहले दिए अंतरिम आदेश एफआईआर दर्ज करने में बाधा थे।
कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि सरकार द्वारा लिया गया स्टैंड फेस सेविंग डिवाइस जैसा प्रतीत होता है, क्योंकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अचानक एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट ने चिंता जताई कि यदि एफआईआर 5 वर्ष बाद केवल न्यायिक दबाव में दर्ज हो रही है तो जांच की निष्पक्षता पर स्वाभाविक सवाल उठेंगे।
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