कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। सिंधिया राजपरिवार की अरबों रुपये की पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में आज की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। ग्वालियर जिला न्यायालय में होने वाली सुनवाई में प्रतिमा देवी की आपत्ति और सिंधिया परिवार की ओर से पेश किए गए जवाबों पर विस्तार से बहस हो सकती है। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही संपत्ति से जुड़े इस पुराने विवाद में अब अदालत के सामने यह सवाल भी अहम है कि क्या प्रस्तावित समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी या कानूनी आपत्तियां इसमें अड़चन बनेंगी।
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दरअसल, सिंधिया राजपरिवार की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछली सुनवाई में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति के जवाब में आवेदन पेश किए गए थे। अब अदालत इन जवाबी आवेदनों और प्रतिमा देवी की ओर से उठाए गए अधिकार संबंधी सवालों पर विस्तार से सुनवाई करेगी। प्रतिमा देवी की ओर से सबसे बड़ी आपत्ति प्रस्तावित समझौते को लेकर है। उनका कहना है कि उनकी मां पद्मावती राजे की संपत्ति से जुड़े अधिकारों को ध्यान में रखे बिना परिवार के दूसरे सदस्यों के बीच समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। प्रतिमा देवी ने उत्तराधिकारी होने के नाते अपने अधिकारों पर भी विचार किए जाने की मांग की है। यही आपत्ति अब प्रस्तावित समझौते की राह में बड़ा कानूनी सवाल बन गई है।
वहीं, सिंधिया परिवार की ओर से दाखिल जवाब में प्रतिमा देवी की आपत्ति पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत के सामने यह तर्क भी रखा जा सकता है कि अगर प्रतिमा देवी पहले प्रस्तावित समझौते पर सहमति जता चुकी थीं और बाद में खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था,तो अंतिम चरण में आपत्ति क्यों उठाई गई?,हालांकि इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला अदालत सभी पक्षों को सुनने के बाद ही करेगी।
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इस संपत्ति विवाद में सिर्फ संपत्ति के बंटवारे का सवाल नहीं है, बल्कि उत्तराधिकार, पारिवारिक अधिकार और वर्षों पुराने विवाद को खत्म करने की कोशिश भी जुड़ी हुई है। एक तरफ परिवार के सदस्यों के बीच समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ प्रतिमा देवी की आपत्ति इस प्रक्रिया पर कानूनी सवाल खड़े कर रही है।
यानी आज की सुनवाई सिर्फ एक आपत्ति या जवाब पर सुनवाई नहीं है, बल्कि यह तय करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम हो सकती है कि सिंधिया राजपरिवार की पैतृक संपत्ति से जुड़े वर्षों पुराने विवाद का रास्ता समझौते से निकलेगा या कानूनी लड़ाई अभी और लंबी चलेगी। अब सबकी नजर अदालत की सुनवाई और इस पर आने वाले अगले आदेश पर है।
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