पुरी। ओडिशा के शांत और खूबसूरत अस्तरंगा समुद्र तट पर इन दिनों एक अलग ही हलचल है। रोजाना की तरह समुद्र की लहरें किनारे से टकरा रही थीं, लेकिन तभी पानी के भारी थपेड़ों के साथ एक विशालकाय, अजीब सा लोहे का ढांचा तैरता हुआ किनारे आ गया। देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई और सैलानियों से लेकर स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ इस ‘अजनबी मेहमान’ को देखने के लिए उमड़ पड़ी।

दरअसल, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के कारण पिछले कुछ दिनों से समुद्र का मिजाज बदला हुआ है। उफनती लहरों और तेज हवाओं के बीच यह विशालकाय ढांचा अपने लंगर से टूटकर बह आया और अब बीच की सुनहरी रेत में आधा धंसा हुआ है।

प्रशासन और जानकारों ने बताया कि यह कोई मामूली लोहे का टुकड़ा नहीं, बल्कि समुद्र का एक सच्चा ‘मार्गदर्शक’ यानी नेविगेशन ब्वॉय है।

यह काम कैसे करता है? यह समंदर की गहराई में जहाजों, नावों और अपनी जान जोखिम में डालकर मछली पकड़ने वाले मछुआरों को सुरक्षित रास्ता दिखाता है। अंधेरे का साथी: इसके ऊपर एक विशेष लाइट लगी होती है, जो सूरज ढलते ही अपने आप जल उठती है। रात के घने अंधेरे में यह टिमटिमाती लाइट नाविकों को बताती है कि आगे कहाँ खतरा है और कहाँ सुरक्षित रास्ता।

ग्रामीणों की यादें और कौतूहल

तटीय गांव के बुजुर्गों ने बताया कि सालों पहले समुद्री मत्स्य विभाग ने उनके अपनों की सुरक्षा के लिए इसे गहरे समंदर में स्थापित किया था। आज जब यह लहरों के थपेड़े खाकर खुद किनारे आ लगा है, तो लोग इसे बड़े कौतूहल से देख रहे हैं।

“यह सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं है, इसने न जाने कितने नाविकों के घरों के चिरागों को समुद्र के तूफानों से बचाकर सुरक्षित किनारे तक पहुँचाया है।” – एक स्थानीय ग्रामीण

सैलानियों और बच्चों के लिए तो यह किसी अजूबे जैसा है। लोग इसके पास जाकर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, सेल्फी ले रहे हैं और इसके विशाल आकार को देखकर हैरान हो रहे हैं।

सुरक्षा की चिंता भी है जरूरी

जहां एक तरफ इसे देखने का उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग थोड़े चिंतित भी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस भारी-भरकम ढांचे को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाए। बीच पर उमड़ती भीड़ के कारण कोई दुर्घटना न हो और सबसे जरूरी बात इसे वापस अपनी जगह लगाया जा सके ताकि समंदर में गए नाविकों को रात के अंधेरे में भटकना न पड़े।

लोहे का यह विशाल ‘मार्गदर्शक’ आज भले ही रेत पर बेबस पड़ा है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि समंदर की गहराइयों में भी इंसानी जिंदगियों को बचाने का एक मौन ताना-बाना लगातार काम करता रहता है।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H