अनिल मालवीय, सीहोर। पवित्र श्रावण मास की इस पावन वेला में सीहोर स्थित सीवन नदी के तट पर अनुपम धार्मिक उल्लास और अटूट अस्था का दृश्य परिलक्षित हो रहा है। सुदूर अंचलों और दूर-दराज के क्षेत्रों जैसे भोपाल से पधारीं प्रियंका परिहार व छिंदवाड़ा से पधारे मनोज डहरिया समेत हजारों की संख्या में श्रद्धालु-कावड़िये सीवन नदी के तट पर एकत्र होकर कुबेरेश्वर धाम के लिए जल भरकर प्रस्थान कर रहे हैं।

​निर्मलता पर भारी पड़ी अगाध भक्ति

​श्रावण मास के जलप्लावन और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण सीवन नदी का जल कलुषिता गंदगी व अशुद्धता से ग्रस्त दिखाई दे रहा है, फिर भी भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं का समर्पण अवर्णनीय है। जब संवाददाता ने जल की अशुद्धता पर प्रश्न चिन्ह अंकित किया, तो श्रद्धालुओं के मुख से निकला केवल आस्था का संकीर्तन। प्रियंका परिहार (श्रद्धालु, भोपाल) ने कहा कि मानो तो मैं गंगा मां हूं, न मानो तो बहता पानी… देवाधिदेव महादेव तो भाव के भूखे हैं। ​श्रद्धालुओं का स्पष्ट मानना है कि शिव कृपा के समक्ष बाह्य भौतिक अशुद्धियां गौण हो जाती हैं। भावना शुद्ध हो, तो दूषित जल भी गंगाजल समान पवित्र बन जाता है।

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​प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर आस्था भारी

​छिंदवाड़ा से पहुंचे श्रद्धालु मनोज डहरिया ने भावुक होकर व्यक्त किया कि यद्यपि जल की स्थिति चिंताजनक है और घाटों की स्वच्छता पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना चाहिए, किंतु भक्ति पथ पर अग्रसर शिवभक्तों के कदम रुकने वाले नहीं हैं। जल में स्वच्छता और निर्मलता बनाए रखने हेतु प्रशासनिक स्तर पर और अधिक ठोस, व्यवस्थित प्रबन्धों की नितांत आवश्यकता महसूस की जा रही है।

​कुबेरेश्वर धाम की ओर अविरल पथगामी

​हाथों में पवित्र कावड़ और कलश धारण किए हर-हर महादेव और ‘जय शिव शंभू’ के गगनभेदी जयघोषों के साथ श्रद्धालुओं का जत्था अनवरत कुबेरेश्वर धाम की ओर अग्रसर है। दूषित सलिल भी श्रद्धालुओं के अडिग विश्वास और भक्ति भावना को डिगा नहीं पाया है।

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