अजयारविंद नामदेव, शहडोल। कहते हैं कि अगर खुश रहने की चाहत सच्ची हो, तो रास्ते अपने आप निकल आते हैं। सुविधाओं की कमी कभी भी बच्चों की मुस्कान और खुशियों के आड़े नहीं आ सकती। कुछ ऐसा ही मन मोह लेने वाला नजारा आदिवासी बहुल शहडोल जिले में देखने को मिला है, जहां ग्रामीण बच्चों ने महंगे स्विमिंग पूल या वाटर पार्क का इंतजार करने के बजाय खेत में जमा पानी को ही अपना ‘देसी वाटर पार्क’ बना डाला। खेत के बीच बने एक गड्ढे में बारिश का पानी जमा हुआ तो बच्चों ने इसे ही अपनी गर्मी और मौज-मस्ती का ठिकाना बना लिया, कोई छलांग लगा रहा है, कोई तैराकी कर रहा है और कोई दोस्तों के साथ जमकर मस्ती, शहडोल के इन बच्चों का ये देसी जुगाड़ देखकर आप भी कहेंगे, सुविधाएं कम हो सकती हैं, लेकिन खुशियां मनाने का हुनर कम नहीं होना चाहिए।
जनपद पंचायत बुढ़ार के खामिडोल का मनमोहक नजारा
यह खूबसूरत तस्वीर शहडोल जिले के जनपद पंचायत बुढ़ार के जैतपुर क्षेत्र में खामिडोल-बोकरा मार्ग के आसपास का है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले इन बच्चों के लिए बड़े शहरों जैसे स्विमिंग पूल और वाटर पार्क तक पहुंचना आसान नहीं है। ऐसे में खेत में जमा बारिश का पानी ही उनके लिए खुशियों का पूल बन गया।

बिना टिकट और बिना किसी खर्चे के अनलिमिटेड मस्ती
तस्वीरें और वीडियो सामने आए तो बच्चों का यह अनोखा जुगाड़ लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने लगा, खेत के बीच बने एक गड्ढे में बारिश का पानी क्या जमा हुआ, ग्रामीण बच्चों ने उसे ही बना डाला अपना देशी स्विमिंग पूल में कोई पानी में छलांग लगा रहा है तो कोई तैराकी का मजा ले रहा है। बच्चों के लिए न महंगा टिकट चाहिए, न वाटर पार्क की जरूरत बस पानी मिला और शुरू हो गई मस्ती।

‘जहां चाह, वहां राह’: खुशियों का सबसे बड़ा सबक
इन बच्चों के पास भले ही बड़े-बड़े वाटर पार्क न हों, लेकिन उनके पास एक छोटा सा गड्ढा, बारिश का पानी और बेफिक्र खुशियों का खजाना है। इन बच्चों की मस्ती यह सिखाती है कि खुश रहने के लिए हमेशा बड़ी-बड़ी सुविधाओं की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक छोटा सा देसी जुगाड़ भी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल बन जाता है। इन बच्चों ने सच साबित कर दिया ‘जहां चाह होती है, वहां राह अपने आप निकल आती है!’

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