मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. धार्मिक नगरी अयोध्या राम मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार और बदलाव का क्रम जारी है. इसी के तहत मंदिर की धार्मिक समिति ने पूजा पद्धति और पुजारियों के आचार-विचार की समीक्षा के बाद रामानंदी परंपरा के नियमों को कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया है. नई व्यवस्था के तहत गर्भगृह में केवल रामानंदी परंपरा में दीक्षित और तुलसी कंठी धारण करने वाले पुजारी ही प्रवेश कर सकेंगे. वहीं मोबाइल फोन ले जाने पर भी रोक लगा दी गई है. सोशल मीडिया पर बयानबाजी से भी पुजारियों को दूर रहने के निर्देश हैं.
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धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास के अनुसार,बदलाव का उद्देश्य मंदिर परिसर का वातावरण धार्मिक बनाए रखना है. पुजारियों के लिए पीले रंग के वस्त्र अनिवार्य किए गए हैं. रोज धुले हुए रेशमी अथवा सूती वस्त्र पहनने होंगे. पुजारी दाढ़ी-मूंछ और शिखा रखने के साथ ही क्लीन शेव रह सकते हैं. ड्यूटी के दौरान शौच आदि के लिए बाहर जाने पर स्नान करके और धुले वस्त्र धारण करने पर ही प्रवेश दिया जाएगा. पुजारी के परिवार में जन्म या मृत्यु होने पर सूतक की अवधि में गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. शुद्धिकरण के बाद ही पूजा की अनुमति होगी.
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राग-भोग में भी बदलाव
सुबह मंगला आरती से पहले रामलला को बाल स्वरूप के अनुरूप भजन गाकर जगाया जाएगा. इसके लिए अयोध्या के मंदिरों से गायकों की टीम लगाई जाएगी. अलग-अलग समय के भोग का मेन्यू भी अलग होगा. भोग मंदिर परिसर के ग्रीन हाउस के पास स्थित किचन में तैयार किया जाएगा. इसमें दाल, चावल, सब्जी, खीर, मालपुआ, पूड़ी, कचौड़ी और हलवा आदि शामिल होंगे। भोग प्रसाद श्रद्धालुओं में भी वितरित किया जाएगा.



