अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश का शहडोल जिला आज नारी सशक्तीकरण और ‘विमेंस लीडरशिप’ की एक बेमिसाल और ऐतिहासिक मिसाल बनकर उभरा है। जिले में नई कलेक्टर के रूप में आईएएस अधिकारी मिशा सिंह की पदस्थापना के बाद प्रशासनिक और जन-प्रतिनिधित्व के लगभग सभी अहम पदों पर महिलाओं का दबदबा कायम हो गया है। प्रशासन के शीर्ष पदों से लेकर जनसेवा और राजनीतिक क्षितिज तक, आज शहडोल की पूरी कमान महिलाओं के मजबूत हाथों में है।
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शीर्ष प्रशासन से लेकर पंचायत-नगर पालिका तक महिलाओं का कब्जा
शहडोल संभाग और जिले में सुशासन की कमान संभाल रहीं महिला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सूची बेहद प्रभावशाली है।
संभाग के सर्वोच्च पदों पर महिला शक्ति: शहडोल संभाग में कमिश्नर सुरभि गुप्ता और आईजी एन. चैत्रा पूरी मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रही हैं।
कलेक्टर और सांसद भी महिला: जिले की कमान नई कलेक्टर मिशा सिंह के पास है, तो वहीं शहडोल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सांसद हिमाद्रि सिंह कर रही हैं।
अनुविभागों में भी दबदबा: जिले के सोहागपुर, जयसिंहनगर, ब्यौहारी और बुढ़ार में एसडीएम के पदों पर भी महिला अधिकारी ही कार्यरत हैं।
राजनीतिक और अन्य प्रमुख पद: इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष, सिविल सर्जन, भाजपा जिलाध्यक्ष, तथा बुढ़ार और धनपुरी नगरपालिका अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी महिलाओं की ही प्रभावी भागीदारी है।
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सुशासन और विकास का नया ‘शहडोल मॉडल’
यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि बदलते दौर की वह तस्वीर है जो यह साबित करती है कि जब महिलाओं को नेतृत्व की कमान सौंपी जाती है, तो सुशासन और संवेदनशीलता का एक नया अध्याय शुरू होता है। प्रशासन से लेकर राजनीति तक, हर जगह महिलाओं की इस मजबूत मौजूदगी से जिलेवासियों को पारदर्शी कार्यशैली और विकास की नई बुलंदियों की उम्मीद है। शहडोल का यह ‘विमेंस लीडरशिप मॉडल’ आज पूरे प्रदेश और देश के लिए एक नई प्रेरणा बन चुका है।
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