मोहित भावसार, शाजापुर। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत ‘स्कूल चलो अभियान’ का शंखनाद हो चुका है। प्रदेश सरकार का दावा है कि सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से बेहतर बनाया जा रहा है, लेकिन शाजापुर जिले से आई जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जिले के कई स्कूलों में पहले ही दिन अव्यवस्थाओं, गंदगी और जिम्मेदारों की लापरवाही का ऐसा नजारा दिखा जिसने सरकार के इश महत्वकांक्षी अभियान का माखौल बना दिया है।

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निर्धारित समय के बावजूद लटके मिले ताले, स्कूलों में पसरा कबाड़

शासन के निर्दश के अनुसार स्कूलों का समय सुबह 10:30 से शाम 04:30 बजे तक तय किया गया है लेकिन जब लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने शाजापुर जिले के एक दर्जन से अधिक स्कूलों का रियलिटी चेक किया तो चौंकाने वाली तस्वीरों सामने आई।

सुबह 11:00 बजे के बाद भी कई ग्रामीण स्कूलों के मुख्य द्वार पर ताले लटके मिले। जो स्कूल खुले भी थे, वे किसी कूड़ाघर से कम नहीं लग रहे थे। दीवारों पर जाले, टेबल-कुर्सियों पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। वहीं अधिकतर स्कूलों में बच्चे पहुंचे ही नहीं पहुंचे और जहां इक्का-दुक्का बच्चे दिखे वहां शिक्षक स्कूल से गायब थे। दो से तीन शिक्षकों की तैनाती वाले स्कूलों में बमुश्किल एक ही शिक्षक मौजूद मिला।

खंडहर हो चुकी बिल्डिंग में बैठने को मजबूर बच्चे

प्रशासनिक उदासीनता की सबसे डरावनी तस्वीर ग्राम पंचायत निजामड़ी के सरकारी स्कूल में देखने को मिली। स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि खुद स्कूल के शिक्षक कमरों के अंदर जाने से डरते हैं।

स्कूल स्टाफ के मुताबिक इंजीनयर ने लिखित हिदायत दी है कि इस भवन के अंदर कक्षाएं न लगाई जाएं क्योंकि यह कभी भी गिर सकता है। कई बार आवेदन देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। वहीं एक स्कूल में शिक्षिका ने अजीब दलील दी। स्कूल का ताला सुबह 11 बजे तक लगा रहा और जब वह पहुंची तो उन्होंने इसके लिए संसाधनों की कमी का बहाना बनाया।

कैमरों के सामने मुस्कुराते रहे गुरुजी

सेतखेड़ी स्कूल में बच्चे न आने पर शिक्षक राजेश मालवीय ने अजीब तर्क देते हुए कहा कि गर्मी बहुत है, इसलिए बच्चे नहीं आ पाए। खामखेड़ा शासकीय प्राथमिक स्कूल की बात करें तो वहां शाला प्रभारी नदारद मिले। मौके पर मौजूद संविदा शिक्षक नारायण गिरी गोस्वामी कैमरे के सामने पहले तो मुस्कुराते रहे, फिर बोले- आप रुकिए, मैं साफ-सफाई करके बच्चों को बुलाता हूं, फिर वीडियो बना लेना।

DPC ने कहा- होगी कार्रवाई

इस पूरे मामले पर जिला परियोजना समन्वयक (DPC) धीरज बिरथिया ने कहा कि मामला मीडिया के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है। लापरवाही बरतने वाले दोषी शिक्षकों और प्रभारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि एक तरफ सरकार निजी स्कूलों पर नकेल कसकर आमजन से बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने की अपील कर रही है लेकिन अगर सरकारी स्कूलों के हालात किसी ‘कूड़ा मैदान’ जैसे और शिक्षकों का रवैया उदासीन रहेगा तो कौन से माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य यहां सुरक्षित मानेंगे?

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