कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश की श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनके ऊपर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने सरकार के विरोधाभासी रवैये पर भी सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए हैं।
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दरअसल, श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग के निर्वाचन को सुमेर सिंह ने चुनौती दी थी। इस मामले में चुनाव न्यायाधिकरण ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि अध्यक्ष के निर्वाचन की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए याचिका समय से पहले दायर की गई है। लेकिन जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रेणु गर्ग के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता था कि उनके चुनाव का कोई अलग गजट प्रकाशन नहीं हुआ है, फिर भी उन्होंने निचली अदालत में इसी आधार पर आपत्ति उठाकर प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की।
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कोर्ट ने साफ कहा कि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसी के चलते रेणु गर्ग पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वर्ष 2020 के संशोधन के बाद नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है। ऐसे में अलग से गजट नोटिफिकेशन की अनिवार्यता के आधार पर किसी को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अध्यक्ष का कार्यकाल पहली बैठक से ही शुरू माना जाएगा और उसी दिन से चुनाव को चुनौती देने का अधिकार भी प्रभावी हो जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने हारमोनियस कंस्ट्रक्शन के सिद्धांत का हवाला देते हुए निचली अदालत को निर्देश दिए हैं कि चुनाव याचिका का निराकरण नवंबर 2026 तक हर हाल में किया जाए। साथ ही कोर्ट ने मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारियों की जांच कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश भी दिए हैं।

