कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर का मुद्दा गरमा गया है। इस बार सवाल उठाया है जननायक जनता पार्टी (JJP) यूथ विंग के अध्यक्ष Digvijay Chautala ने, जिन्होंने मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के लगातार पंजाब दौरों और वहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में चुनाव प्रचार को लेकर तीखा हमला बोला है। दिग्विजय चौटाला ने सीधे मुख्यमंत्री से सवाल दागते हुए पूछा है कि “जो मुख्यमंत्री आज पंजाब में बीजेपी के लिए वोट मांग रहे हैं, क्या चुनाव के बाद अगर वहां भाजपा की या भाजपा समर्थित सरकार बनती है, तो क्या वह हरियाणा को उसका हक—SYL का पानी—दिलवा पाएंगे?”

दिग्विजय चौटाला का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंजाब में भाजपा के चुनाव प्रचार में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री की लगातार जनसभाएं, रोड शो और राजनीतिक बैठकों को लेकर विपक्ष पहले से सवाल उठाता रहा है, लेकिन अब जेजेपी ने इसे सीधे हरियाणा के हितों से जोड़ दिया है। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि हरियाणा के लोग यह जानना चाहते हैं कि पंजाब में राजनीतिक मंच साझा करने और वोट मांगने का फायदा राज्य को क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित पड़े SYL मुद्दे पर हरियाणा की जनता सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है।
जेजेपी नेता ने मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर पंजाब में पारंपरिक पगड़ी में नजर आते हैं और पंजाब के लोगों के बीच सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में हरियाणा के किसानों और आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह राजनीतिक सक्रियता केवल चुनावी रणनीति तक सीमित है या फिर इसके बदले हरियाणा के हिस्से का पानी लाने की कोई गंभीर योजना भी है।
दरअसल, SYL नहर का मुद्दा हरियाणा और पंजाब के बीच दशकों पुराना विवाद रहा है। हरियाणा लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा है, जबकि पंजाब में इस मुद्दे को लेकर अलग राजनीतिक रुख देखने को मिलता रहा है। कई बार मामला अदालतों तक पहुंचा, और देश की सर्वोच्च अदालत ने भी हरियाणा के पक्ष में टिप्पणियां कीं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में दिग्विजय चौटाला ने मुख्यमंत्री के पंजाब दौरे को इस बड़े मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की है।
दिग्विजय ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री पंजाब में बीजेपी को मजबूत करने के लिए इतना समय दे रहे हैं, तो हरियाणा के लोग यह उम्मीद भी करेंगे कि वहां बनने वाली किसी भी सरकार से राज्य का हक दिलाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी दिखाई जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से यह भरोसा देने को तैयार हैं कि चुनाव बाद पंजाब सरकार पर SYL को लेकर दबाव बनाया जाएगा और हरियाणा को उसका पानी दिलाया जाएगा।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दिग्विजय चौटाला का यह हमला केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश भी है। हरियाणा में पानी, किसान और क्षेत्रीय अधिकार जैसे मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में SYL का मुद्दा उठाकर जेजेपी खुद को हरियाणा के हितों की आवाज के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। खासतौर पर ऐसे समय में जब प्रदेश की राजनीति में गठबंधन, किसान मुद्दे और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति नए सिरे से आकार ले रही है।
दूसरी ओर, भाजपा लगातार यह दावा करती रही है कि वह हरियाणा के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, दिग्विजय चौटाला के सवाल के बाद अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस मुद्दे पर खुलकर जवाब देंगे। क्या पंजाब में भाजपा के लिए प्रचार करने का कोई राजनीतिक फायदा हरियाणा को भी मिलेगा, या फिर यह केवल चुनावी समीकरणों तक सीमित रहेगा—यह सवाल अब विपक्ष खुलकर पूछ रहा है।
हरियाणा की राजनीति में अक्सर देखा गया है कि जब भी चुनावी माहौल बनता है, SYL नहर का मुद्दा फिर से केंद्र में आ जाता है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में यह केवल पानी का सवाल नहीं, बल्कि अधिकार और भविष्य से जुड़ा विषय माना जाता है। ऐसे में दिग्विजय चौटाला द्वारा उठाया गया सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस सवाल का जवाब किस अंदाज में देते हैं। क्या वे पंजाब में भाजपा के प्रचार और हरियाणा के हितों के बीच कोई स्पष्ट रोडमैप सामने रखेंगे, या फिर विपक्ष के इस हमले को केवल राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज करेंगे। फिलहाल इतना तय है कि दिग्विजय चौटाला के इस बयान ने हरियाणा की राजनीति में SYL के पुराने जख्म को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
