Technology Desk – यूरोपीय संघ (EU) ने टेक कंपनी गूगल (Google) पर डिजिटल मार्केट्स एक्ट (Digital Markets Act-DMA) के तहत एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 89 करोड़ यूरो (लगभग 7,600 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है. आयोग का कहना है कि गूगल ने अपने सर्च इंजन और प्ले स्टोर से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया और अपनी सेवाओं को अनुचित बढ़त देने के साथ ऐप डेवलपर्स पर भी ऐसे प्रतिबंध लगाए, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में बड़ी टेक कंपनियों पर बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने का दबाव लगातार बढ़ रहा है.

किन वजहों से लगा जुर्माना?
यूरोपीय आयोग के अनुसार, मामला दो अलग-अलग उल्लंघनों से जुड़ा है. पहले मामले में आरोप है कि गूगल (Google) ने अपने सर्च परिणामों में प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म की तुलना में अपनी सेवाओं, जैसे शॉपिंग, होटल बुकिंग और फ्लाइट से जुड़े विकल्पों को अधिक प्रमुखता दी. आयोग का मानना है कि इससे अन्य कंपनियों को बराबरी का अवसर नहीं मिला.
दूसरा मामला गूगल (Google) प्ले स्टोर से जुड़ा है. जांच में पाया गया कि ऐप डेवलपर्स को अपने ग्राहकों को बाहरी वेबसाइट या वैकल्पिक ऐप स्टोर पर उपलब्ध सस्ते सब्सक्रिप्शन और ऑफर की जानकारी देने में कई तरह की सीमाओं का सामना करना पड़ा. ईयू का कहना है कि ऐसे प्रतिबंध डिजिटल बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत के खिलाफ हैं.
डिजिटल मार्केट्स एक्ट क्या है?
डिजिटल मार्केट्स एक्ट यूरोपीय संघ का वह कानून है, जिसे बड़ी डिजिटल कंपनियों के प्रभाव को संतुलित करने और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है. इस कानून के तहत बड़ी टेक कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर सभी सेवाओं और कारोबारियों के साथ समान व्यवहार करना होता है. नियमों का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है.
अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ सकता है विवाद
इस फैसले के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की चर्चा भी तेज हो गई है. अमेरिकी पक्ष का मानना है कि यूरोप लगातार अमेरिकी टेक कंपनियों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है. वहीं, यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है और इसका किसी व्यापारिक या टैरिफ विवाद से संबंध नहीं है.
गूगल ने फैसले पर जताई आपत्ति
गूगल (Google) ने यूरोपीय संघ के फैसले से असहमति जताई है. कंपनी का कहना है कि वह इस आदेश को अदालत में चुनौती देगी और जुर्माने पर अंतरिम राहत की मांग भी करेगी. गूगल का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म में किए गए बदलाव उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से हैं और आयोग का फैसला नवाचार तथा सेवाओं की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है.
यूरोप में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यूरोपीय संघ पिछले कई वर्षों से बड़ी टेक कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा संबंधी नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. गूगल (Google) पर इससे पहले भी सर्च, विज्ञापन और एंड्रॉयड से जुड़े मामलों में अरबों यूरो का जुर्माना लगाया जा चुका है. ताजा कार्रवाई यह संकेत देती है कि डिजिटल बाजार अधिनियम के तहत निगरानी और सख्ती आगे भी जारी रह सकती है.


