Dharm Desk – भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं। विधि-विधान से लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करते है। हालांकि, इस पर्व को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं और धारणाएं भी प्रचलित हैं। ऐसी ही एक मान्यता है कि यदि जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए, तो परिवार को तब तक जन्माष्टमी का त्योहार नहीं मनाना चाहिए, जब तक उसी दिन परिवार में किसी बच्चे का जन्म न हो जाए। वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज ने इस धारणा को गलत बताया है।

प्रेमानंद जी महाराज ने बताया- ये घोर सांसारिकता की सोच
प्रेमानंद जी महाराज से जब इस विषय में सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी की मृत्यु होने के कारण भविष्य में इस पर्व को मनाना हमेशा के लिए बंद कर देना उचित नहीं है। महाराज जी ने इस विचार को घोर सांसारिकता की सोच बताया। उन्होंने समझाया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव किसी एक परिवार के सुख-दुख या किसी व्यक्ति के जन्म-मृत्यु से नहीं जुड़ा हैं। ऐसे में केवल इस वजह से कि इसी दिन हमारे परिवार को सदस्य मृत्यु को प्राप्त हुआ था। भगवान का जन्मोत्सव हमेशा के लिए बंद कर देना उचित नहीं माना जा सकता। महाराज जी ने भावार्थ रूप में सवाल किया कि क्या जब तक जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी बच्चे का जन्म नहीं होगा, तब तक प्रभु का जन्मोत्सव नहीं मनाया जाएगा? उन्होंने इस सोच को पूरी तरह अनुचित बताया।
मृत्यु होने पर कितने दिन नहीं मनानी चाहिए त्योहार?
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, यदि जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उस समय परिवार को शोक और सूतक के नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 11 दिनों के सूतक काल में शांति से शोक मनाया जाए और भगवान का नाम-जप एवं भजन किया जाए। इसके बाद आने वाली अगली श्री कृष्ण जन्माष्टमी को त्योहार को हमेशा के लिए बंद करने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धालु को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पुनः श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए । यानी परिवार में हुई मृत्यु को जन्माष्टमी का स्थायी रूप से त्याग करने का कारण नहीं बनाना चाहिए।
श्रीकृषण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी
वैदिक पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय पूजा करते हैं। लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री सहित विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और पूजा करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं। जीवन में भगवान की कृपा बनी रहती है । प्रेमानंद जी महाराज की बात का सार यही है कि परिवार में मृत्यु के कारण भगवान के जन्मोत्सव को हमेशा के लिए रोक दे ना उचित नहीं, बल्कि शोक की अवधि पूरी होने के बाद श्रद्धा और भक्ति के साथ जन्माष्टमी मनानी चाहिए।


