ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड)। भारत के गौरवशाली पैरा-आर्मरेसलर श्रीमंत झा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है। स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में 12 जून से 15 जून 2026 तक आयोजित Swiss Open Armwrestling Cup 2026 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए PIUH -85 किलोग्राम वर्ग में भारत के लिए कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) जीता।
कड़े मुकाबले में श्रीमंत झा ने अपनी ताकत, तकनीक और अनुभव का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए क्रोएशिया के खिलाड़ी को पराजित कर पोडियम पर अपनी जगह सुनिश्चित की। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने आगामी World Para Armwrestling Championship के लिए भी सफलतापूर्वक क्वालीफाई कर लिया है।
शहीद जवानों को समर्पित किया पदक

अपनी इस ऐतिहासिक सफलता को श्रीमंत झा ने भारत के वीर शहीद सैनिकों को समर्पित किया। पदक जीतने के बाद उन्होंने कहा- “मेरी हर जीत उन बहादुर सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह कांस्य पदक मैं सभी शहीद जवानों के सम्मान में समर्पित करता हूँ।”
भारत के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय पैरा-आर्मरेसलरों में शामिल

इस नवीन उपलब्धि के साथ श्रीमंत झा के नाम अब भारत के लिए कुल 67 अंतरराष्ट्रीय पदक दर्ज हो चुके हैं। वे देश के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर भारतीय पैरा-आर्मरेसलिंग को वैश्विक पहचान दिलाई है।
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संघर्ष के बावजूद जारी है देश के लिए समर्पण
श्रीमंत झा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीतने और देश का गौरव बढ़ाने के बावजूद उन्हें अब तक कोई महत्वपूर्ण कैश अवॉर्ड या सरकारी खेल सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक सरकारी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है, लेकिन आज भी स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनके खेल योगदान, अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों और देश के प्रति समर्पण को देखते हुए भारत सरकार, प्रधानमंत्री तथा छत्तीसगढ़ सरकार उनके जीवन-यापन और खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए शीघ्र ही उपयुक्त सरकारी नौकरी एवं सम्मान प्रदान करेंगे।
अगला लक्ष्य – विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
श्रीमंत झा ने कहा – “यह उपलब्धि मेरे लिए बेहद विशेष है। मैं हर मुकाबले में देश के वीर जवानों से प्रेरणा लेकर उतरता हूँ। अब मेरा अगला लक्ष्य विश्व पैरा-आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का तिरंगा विश्व मंच पर सबसे ऊंचा लहराना है।”
श्रीमंत झा की यह उपलब्धि न केवल भारतीय पैरा-खेलों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह उन खिलाड़ियों के संघर्ष, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की भी मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
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