अमित पाण्डेय, सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आई है। हफ्ता भर भी नहीं बीता था कि लोकायुक्त ने दूसरी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए जिला न्यायालय के डीपीओ (जिला लोक अभियोजन अधिकारी) को जिला न्यायालय के ठीक बाहर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। लोकायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से न्यायालय परिसर और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
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चेक बाउंस मामले में मांगी थी 20 हजार की घूस
मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला चेक बाउंस से जुड़ी एक शिकायत से जुड़ा हुआ है। फरियादी के चेक बाउंस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए कानूनी अभिमत देने के एवज में आरोपी डीपीओ द्वारा कुल 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
किश्तों में घूसखोरी का खेल
लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक भ्रष्ट अधिकारी फरियादी से पहले ही 8 हजार रुपये की रकम ऐंठ चुका था। इसके बाद रिश्वत की दूसरी किश्त के रूप में जैसे ही फरियादी ने 10 हजार रुपये थमाए, वैसे ही पहले से जाल बिछाकर बैठी लोकायुक्त की टीम ने अधिकारी को दबोच लिया।
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जिला न्यायालय के सामने मैदान में बिछाया जाल, सर्किट हाउस में कार्रवाई जारी
लोकायुक्त की टीम ने इस पूरी ट्रैपिंग की कार्रवाई को बेहद फिल्मी अंदाज में जिला न्यायालय के ठीक सामने स्थित ग्राउंड में अंजाम दिया। लोकायुक्त की 15 सदस्यीय भारी-भरकम टीम इस समय आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर सीधी के सर्किट हाउस पहुंची है, जहां नोट जब्त करने और हाथ धुलवाने सहित आगे की कागजी व वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जिले में लगातार हो रही लोकायुक्त की इस बैक-टू-बैक कार्रवाई से रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों में खौफ का माहौल है।
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