अमित पांडेय, सीधी। मध्य प्रदेश का आदिवासी बाहुल्य सीधी जिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। अस्पताल की बदहाली और लापरवाही का आलम यह है कि यहां बीते एक वर्ष में 53 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। यह चौंकाने वाला आंकड़ा अब प्रदेश स्तर पर भारी चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
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संसाधनों की कमी और लापरवाही ले रही जान
सीधी जिला अस्पताल लंबे समय से बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों से जब प्रसूताओं को गंभीर हालत में यहां लाया जाता है तो उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता। अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ एवं चिकित्सा संसाधनों की कमी और खराब प्रसव प्रबंधन के कारण अक्सर महिलाओं की स्थिति बिगड़ जाती है।
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सिर्फ ‘रेफर’ करने का केंद्र बना अस्पताल
मरीजों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय गंभीर मरीजों को तुरंत दूसरे बड़े शहरों के लिए रेफर कर देता है। गंभीर हालत में सफर करने के कारण कई महिलाएं रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। 1 साल में 53 माताओं की मौत ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी है। मानवाधिकार आयोग के कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि क्या दोषी अधिकारियों पर कोई कड़ी कार्रवाई होगी या फिर हमेशा की तरह केवल आश्वासनों का खेल चलता रहेगा।

