Dharm Desk – साल की 24 एकादशी का अपना अलग-अलग महत्व है। इन सब में कामिका एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सावन महीने में आने वाली कामिका एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित होता है और मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा मनो कामनाएं पूर्ण होती हैं । सावन का महीना जहां भगवान भोले बाबा की आराधना का समय होता है, वहीं इसी पावन काल में आने वाली कामिका एकादशी शिव और विष्णु दोनों कीकृपा पाने का अवसर देती है। यही कारण है कि जिनघरों में दोनों देवों की पूजा होती है, वहां इस एकादशी का महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है।

एकादशी तिथि कब है

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कामिका एकादशी की तिथि 8 अगस्त को दोपहर 1.59 मिनट से प्रारंभ होकर 9 अगस्त को सुबह 11.4 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। व्रत का पारण 10 अगस्त को सुबह 5.47 मिनट से लेकर 08.01 मिनट तक किया जा सकेगा। वहीं, पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7.27 मिनट से दोपहर 12.26 मिनट तक रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत फल देने वाली होती है।

एकादशी तिथि पर पूजा करने की विधि

कामिका एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की पूजा करे । पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करें। तुलसी के पत्तों का विशेष महत्व होता है। इसलिए बिना तुलसी के भोग अधूरा माना जाता है। व्रत के दौरान एकादशी कथा का पाठ या श्रवण करें और अंत में विष्णु सहस्रनाम का जाप व आरती करें। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास देसी घी का दीपक जलाना भी शुभ होगाl

एकादशी पर मंत्र जाप का विशेष महत्व

इस दिन मंत्र जाप का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु के मंत्र का जप करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। कामिका एकादशी पर कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करना लाभकारी माना गया है.

श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव।
इस मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।