सुरेश पांडेय, सिंगरौली। सिंगरौली के बरगवां थाना क्षेत्र के बंधा कोल ब्लॉक में पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पेड़ काटे जाने के विरोध में एक ग्रामीण ने कथित तौर पर फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। परिजनों और ग्रामीणों ने समय रहते उसे नीचे उतारकर अस्पताल पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि बंधा पीड़रवाह निवासी विश्वनाथ प्रसाद बिंद लंबे समय से महुआ के पेड़ की देखभाल करते आ रहे थे। परिवार के मुताबिक, इसी पेड़ से मिलने वाले महुआ से उनका परिवार गुजर-बसर करता था। आरोप है कि बांधा कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई के दौरान जब महुआ के पेड़ को भी काटने की कोशिश की गई, तो विश्वनाथ ने इसका विरोध किया। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर उसी पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया।

पुश्तैनी मकान को दूसरे के नाम दर्ज करने का आरोप

परिजनों ने उन्हें नीचे उतारा और गंभीर हालत में बैढ़न ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। वहीं परिजनों ने पुश्तैनी मकान को दूसरे के नाम दर्ज किए जाने का भी आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि कोयला खदान के कारण उनका पुश्तैनी मकान भी प्रभावित हो रहा है और उन्हें मुआवजे को लेकर चिंता बनी हुई है। सवाल बड़ा है कि कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई के बीच प्रभावित परिवारों के अधिकार, मुआवजा और पुनर्वास की स्थिति क्या है?

ग्रामीणों की दो टूक

जल-जंगल-जमीन बचाने और मुआवजा व पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने दो टूक में कहा कि “हमें फांसी दो या न्याय दो!” अब सवाल यह है कि प्रशासन और कंपनी ग्रामीणों की इन शिकायतों पर कब तक ठोस कार्रवाई करता है।

पीड़ित ग्रामीण विश्वनाथ बिन्दु ने बताया कि घर, कुआं-बोर सब छोड़ दिए है। जनसुनवाई तो हो रही है लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। दो पुरखा बीत गया, उस घर का चार लाख रुपये बना। हम चार लाख में घर भी नहीं बना पाएंगे। हम घर नहीं छोड़ना चाहते है। मरेंगे तभी घर छोड़ेंगे, ऐसे तो घर नहीं छोड़ेंगे।

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