सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। देश में आपने चोरों द्वारा सोना, चांदी, गाड़ियां और मोबाइल उड़ाने के किस्से तो खूब सुने होंगे, लेकिन मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में इन दिनों एक अनोखा खौफ फैला हुआ है। यहां चोरों को न तो तिजोरी की परवाह है और न ही बैंक की, उनकी पैनी नजर सिर्फ और सिर्फ भैंसों पर टिकी है!
सिंगरौली में भैंस चोरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि बेचारे किसान रात में चैन की नींद सोने के बजाय टॉर्च लेकर अपने बाड़ों के चक्कर काट रहे हैं। आलम यह है कि किसानों को अब अपनी लहलहाती फसलों की कम, और खूंटे से बंधी भैंसों की चिंता ज्यादा सता रही है।
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कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान: ‘साहब! चोरों ने उड़ा दीं 100 से ज्यादा भैंसें’
सोमवार को इस आफत से परेशान होकर एक दर्जन से अधिक किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाई। किसानों का दावा है कि पिछले महज एक साल के भीतर जिले से 100 से ज्यादा भैंसें रहस्यमयी ढंग से गायब हो चुकी हैं। इस चोरी में से 31 भैंसें तो ऐसी हैं जिनका पुलिस आज तक कोई अता-पता नहीं लगा पाई है। मानो वे जमीन निगल गई या आसमान खा गया!
‘मिल्क इकोनॉमी’ चौपट: 12 भैंसें एक साथ साफ, दांव पर बच्चों की पढ़ाई!
इस चोरी का सबसे ताजा और दर्दनाक शिकार बरदघटा टोला भलछेरा के किसान हरेराम गुर्जर हुए हैं। चोरों ने इनके बाड़े पर ऐसा धावा बोला कि एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 12 भैंसें एक साथ गायब कर दीं।
पीड़ित किसान का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि ये भैंसें सिर्फ जानवर नहीं थीं, बल्कि उनकी कमाई का साधन थी। इन्हीं के दूध को बेचकर घर का चूल्हा जलता था, बच्चों की स्कूल फीस भरी जाती थी और पूरा परिवार पलता था। अब भैंसें क्या गईं, पूरे परिवार की रोजी-रोटी ही छिन गई।
यूपी, बिहार और झारखंड तक फैला है ‘भैंस चोरों का सिंडिकेट’?
सुनने में भले ही यह अजीब लगे लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में पशु चोरी का एक बेहद हाईटेक और संगठित गिरोह सक्रिय है। किसानों के मुताबिक सिंगरौली से चोरी होने वाली इन भैंसों को रातों-रात ट्रकों में लादकर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की मंडियों में खपा दिया जाता है। यानी यह कोई आम चोरी नहीं, बल्कि एक ‘इंटरस्टेट बफेलो स्मगलिग रैकेट’ है!
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पुलिस का पुराना राग: ‘जांच जारी है’, पर किसान का सवाल- ‘चोर कब तक बाहर हैं?’
इतने बड़े पैमाने पर हो रही भैंसों की चोरी को लेकर जब पुलिस से बात की गई, तो उनका वही चिर-परिचित जवाब सामने आया कि शिकायतों के आधार पर जांच जारी है, कुछ संदिग्धों को चिन्हित किया गया है और जल्द ही गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा। लेकिन पीड़ित किसानों का सीधा सवाल अब भी प्रशासन के सामने खड़ा है- जब एक-एक करके 100 से ज्यादा भैंसें जिला पार कर गईं, तो पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था का ‘जीपीएस’ उस वक्त किस मोड पर था? अब देखना होगा कि सिंगरौली पुलिस इन ‘काली भैंसों’ के पीछे छिपे ‘सफेदपोश’ चोरों को कब तक बेनकाब कर पाती है।
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