सरोज कुमार गुप्ता, सीतामढ़ी। जिले के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग में तैनात एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को सरकारी अनुदान राशि जारी करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगना भारी पड़ गया। विभाग के मंत्री लखेंद्र पासवान ने खुद फोन पर रिश्वत की बात सुनते ही आरोपी कर्मचारी की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, सीतामढ़ी से कुछ फरियादी अपनी शिकायत लेकर सीधे विभागीय मंत्री लखेंद्र पासवान के पास पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा मिलने वाली सरकारी सहायता और अनुदान राशि को जारी करने के नाम पर एक डेटा एंट्री ऑपरेटर उनसे लगातार 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है। फरियादियों की पीड़ा सुनने के बाद मंत्री ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक्शन लेने का फैसला किया।
मंत्री के सामने खुली पोल, स्पीकर पर सुनी गई बातचीत
फरियादियों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मंत्री ने उन्हें आरोपी कर्मचारी को तुरंत फोन मिलाने का निर्देश दिया। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मंत्री ने कॉल को स्पीकर पर रखवाया ताकि वहां मौजूद सभी लोग बातचीत को स्पष्ट रूप से सुन सकें।
जैसे ही ऑपरेटर ने फोन रिसीव किया, उसने बिना किसी झिझक के अनुदान राशि जारी करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग एक बार फिर दोहरा दी। उस भ्रष्ट कर्मचारी को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उसकी यह घूसखोरी भरी बातचीत कोई आम नागरिक नहीं बल्कि खुद विभाग के मंत्री सुन रहे हैं।
सेवा समाप्त करने के कड़े निर्देश
बातचीत पूरी होते ही मंत्री लखेंद्र पासवान ने बिना कोई वक्त गंवाए सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी को फोन किया। उन्होंने आरोपी डेटा एंट्री ऑपरेटर की सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया।
इसके साथ ही मंत्री ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले में यह जांच की जाए कि कार्यालय के अन्य किन अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही थी। यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोरतम विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग मंत्री के इस कड़े कदम की सराहना कर रहे हैं। मंत्री लखेंद्र पासवान ने दोटूक शब्दों में कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता उनका हक और कानूनी अधिकार है। इस अधिकार के एवज में रिश्वत मांगने वाले किसी भी भ्रष्ट कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे के कदम उठाए जाएंगे।


