हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को मिलने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 9 सरकारी अस्पतालों के पेयजल स्रोतों से लिए गए पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट में कई जगह ई-कोलाई और टोटल कॉलीफॉर्म पाए गए हैं। जांच में सामने आया है कि PC सेठी अस्पताल, एमवाय अस्पताल, मानसिक चिकित्सालय, जिला अस्पताल, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल के पानी के सैंपल में ये बैक्टीरिया मिले हैं।
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ई-कोलाई को आमतौर पर मलजनित प्रदूषण का संकेत माना जाता है। पानी में इसकी मौजूदगी पेयजल की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और दूषित पानी के सेवन से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए RO प्लांट और अन्य पेयजल स्रोतों से पानी के सैंपल लिए गए थे। जांच के दौरान कई स्थानों पर RO प्लांट बंद मिले, जबकि कुछ जगहों पर वाटर कूलर के आसपास साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक जिला अस्पताल में पेयजल व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। यहां सामाजिक संस्था की ओर से लोटों के जरिए पानी वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सातवीं मंजिल के RO और कैंटीन के पानी में भी ई-कोलाई और टोटल कॉलीफॉर्म पाए जाने की बात सामने आई है।
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अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में मिलने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता में इस तरह की कमी सामने आना अस्पताल प्रशासन की हाइजीन और पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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