SMS Stadium Jaipur: जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) क्रिकेट स्टेडियम में खेल गतिविधियों पर फिलहाल रोक लग गई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी पर यह बड़ा फैसला लिया है। स्टेडियम के रखरखाव में भूजल के अंधाधुंध उपयोग पर यह गाज गिरी है। इसके अलावा, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के पानी के इस्तेमाल में भी लापरवाही पाई गई है।

ट्रीटेड पानी की व्यवस्था क्यों हुई ठप?

स्टेडियम को भूजल पर निर्भरता से मुक्त करने के लिए वर्ष 2018 में विशेष योजना बनी थी। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने ज्योति नगर नाले पर एक कस्टमाइज्ड एसटीपी स्थापित किया था। यहां से स्टेडियम तक पाइपलाइन बिछाई गई थी और दो बड़े स्टोरेज टैंक भी बने थे।

हालांकि, यह व्यवस्था लंबे समय तक सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिर में इस प्लांट से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई। नतीजतन, मैदान के रखरखाव के लिए प्रबंधन को फिर से ट्यूबवेल के जरिए भूजल का उपयोग शुरू करना पड़ा।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

वर्ष 2016 में भी आईपीएल मैचों के दौरान यह मामला कोर्ट पहुँचा था। तब राजस्थान हाईकोर्ट ने पानी के संरक्षण को क्रिकेट से ज्यादा अहम बताया था। अदालत ने कहा था कि पीने के पानी के संकट के बीच मनोरंजन के लिए लाखों लीटर ताजे पानी का उपयोग गलत है। इसी आदेश के बाद सरकार ने रोजाना 10 लाख लीटर ट्रीटेड पानी देने की योजना लागू की थी।

क्या है NGT का पूरा मामला?

NGT ने जयपुर के अलावा रायपुर और मुंबई के क्रिकेट स्टेडियमों पर भी रोक लगाई है। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) ने बताया कि इन स्टेडियमों को कई बार नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद प्रबंधन ने आवश्यक रिपोर्ट या अनुपालन दस्तावेज जमा नहीं किए।

NGT ने स्पष्ट कहा है कि भूजल का दोहन रोकना और उपचारित पानी का उपयोग अनिवार्य है। खेल परिषद के सचिव राजकेश मीणा का कहना है कि वे NGT के नोटिस का जवाब तैयार कर रहे हैं। जल्द ही JDA को पत्र लिखकर ट्रीटेड पानी की आपूर्ति फिर से शुरू करवाई जाएगी। अब भविष्य में खेल गतिविधियां बहाल होंगी या नहीं, यह अनुपालन रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

पढ़ें ये खबरें