अमेरिकी सीनेट ने भारत समेत पांच देशों पर 100 % तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले एक विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर दिया है। यह विधेयक रूस से तेल और गैस खरीद जारी रखने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, हालांकि इसके लिए अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की मंजूरी भी आवश्यक है। इस घटनाक्रम को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस मुद्दे को लेकर केंद्र की विदेश और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत के व्यापारिक हितों और अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाले ऐसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। केजरीवाल ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और देश के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के कारण भारत के हित प्रभावित हो रहे हैं। अपने पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा, “देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने के बाद, ट्रंप की ग़ुलामी करने के बाद और भारत का अपमान करवाने के बाद पीएम मोदी देश के लिए ये लाए हैं। आज देश के हर छोटे-बड़े निर्णय में ट्रंप का हस्तक्षेप है। पीएम मोदी ट्रंप की हर बात मानते हैं, चाहे सही हो या गलत और ट्रंप हर क्षेत्र में भारत के खिलाफ निर्णय लेता है।” केजरीवाल ने दावा किया कि अमेरिकी सीनेट के इस फैसले से केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि देशहित से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट और प्रभावी रणनीति अपनानी चाहिए।
अमेरिकी सीनेट ने पास किया बिल
अमेरिकी सीनेट ने रूस तथा उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए एक महत्वपूर्ण विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। विधेयक के समर्थकों का दावा है कि रूस के साथ जारी ऊर्जा व्यापार से यूक्रेन युद्ध को आर्थिक समर्थन मिल रहा है, इसलिए ऐसे देशों पर अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नामक इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट ने 86 के मुकाबले 11 मतों से पारित किया। विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को रूस से तेल और गैस का सर्वाधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार दिया जाएगा।
इस बिल में क्या-क्या प्रावधान हैं?
अमेरिकी सीनेट से पारित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ में रूस और ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त बनाने के कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। विधेयक के अनुसार, रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया से आने वाले सामान पर अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। विधेयक का उद्देश्य रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय को सीमित करना है। इसके समर्थकों का दावा है कि रूस के साथ जारी ऊर्जा व्यापार से उसे यूक्रेन युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक संसाधन मिल रहे हैं। इसी आधार पर रूस के प्रमुख ऊर्जा ग्राहकों पर भी दबाव बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
रूस से जुड़े प्रावधानों के अलावा विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ (Iran Sanctions Act) की अवधि को वर्ष 2031 तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों और संस्थाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। अमेरिका का उद्देश्य ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


