सोनीपत पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी एप्लीकेशन के जरिए विदेशी नागरिकों के मोबाइल हैक कर ठगी को अंजाम देते थे।

संजीव घनगस, सोनीपत। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। एसयूएजी प्रभारी इंस्पेक्टर अजय धनखड़ ने बताया कि ये आरोपी विदेशों में रहने वाले लोगों, विशेषकर अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बनाते थे। पुलिस ने यह कार्रवाई गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर सोनीपत की ओमैक्स सिटी में छापेमारी कर की। पकड़े गए आरोपियों में से एक सोनीपत का स्थानीय निवासी है, जबकि दो अन्य आरोपी बाहरी राज्यों के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

हैकिंग और फर्जी एप्लीकेशन के जरिए ठगी का खेल

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे। गिरोह के सदस्य सबसे पहले अमेरिका में रहने वाले लोगों को उनके मोबाइल पर एक ‘फेक एप्लीकेशन’ का लिंक भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति इस संदिग्ध एप को डाउनलोड करता, उसका मोबाइल तुरंत हैक हो जाता था। इसके बाद आरोपी पीड़ित के बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट तक अपनी पहुंच बना लेते थे और धीरे-धीरे उनकी गाढ़ी कमाई को अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। पुलिस को लंबे समय से इस तरह के अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड की शिकायतें मिल रही थीं।

2 करोड़ की क्रिप्टो करेंसी और नकदी बरामद

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें कई मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल हैं। तलाशी के दौरान एक मोबाइल फोन में करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की USDT (क्रिप्टो करेंसी) मिलने का बड़ा खुलासा हुआ है। इसके अलावा, पुलिस ने मौके से पांच लाख रुपये की नकदी भी बरामद की है। तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस ने दो दिन का रिमांड हासिल किया है। रिमांड के दौरान पुलिस को इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

सतर्कता बरतने के लिए पुलिस की विशेष अपील

सोनीपत पुलिस ने आम जनता और इंटरनेट उपभोक्ताओं से विशेष अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात स्रोत से आए लिंक या संदिग्ध एप्लीकेशन को डाउनलोड करने से बचें। साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी हथियार है। इंस्पेक्टर अजय धनखड़ ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस का यह अभियान लगातार जारी रहेगा और इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए गहन पूछताछ की जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को दें।