राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का फैसला अब राज्यपाल के पास हैं! विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की फाइल निर्णय के लिए राज्यपाल कार्यालय भेजे जाने की सूचना है। गवर्नर मंगूभाई पटेल इस पर फैसले ले सकते हैं। फिलहाल राज्यपाल अभी गुजरात दौरे पर हैं। वे 31 अगस्त को भोपाल लौटेंगे। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। वहीं एसआईटी (SIT) ने अभियोजन की स्वीकृति मांगी है।
गौरतलब है कि विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के हलमा कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर पर ब्रीफिंग देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में फैसला लेने को कहा था, फिर मई में चार सप्ताह का समय दिया। लेकिन 23 जुलाई की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सरकार ने अब तक कोई दस्तावेज दाखिल ही नहीं किया। जिस पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताई थी।
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कांग्रेस हमलावर
इधर, मंत्री विजय शाह को अभियोजन से बचाने की सिफारिश को लेकर कांग्रेस हमलावर है। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लेकर राज्यपाल को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने विजय शाह के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति का निर्णय लेने की मांग की है। सिंघार ने पत्र में कहा कि इस मामले की जांच कर रही SIT ने मंत्री के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति शासन से मांगी है। लेकिन मोहन सरकार अपने ही मंत्री को बचाने के लिए स्वीकृति देने से इनकार कर रही है। इससे सरकार की निष्पक्षता और नियत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसी खुद कह रही है कि मंत्री के खिलाफ अभियोजन चलना चाहिए, तब सरकार और कैबिनेट की ओर से स्वीकृति रोकना यह साबित करता है कि मंत्री के लिए अलग कानून है। आम आदमी और मंत्री के लिए कानून अलग-अलग नहीं हो सकते। कर्नल सोफिया कुरैशी जैसे अधिकारी का अपमान पूरे देश और सेना का अपमान है। ऐसे संवेदनशील मामले में सरकार का अपने मंत्री को संरक्षण देना जनता के बीच गलत संदेश देगा। सरकार कानून के राज की बात करती है, लेकिन व्यवहार में अपने लोगों को बचाने में लगी है।
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राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
उमंग सिंघार ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने मांग की कि राज्यपाल महोदय मंत्री विजय शाह के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें और राज्य सरकार को मंत्रिमंडल के माध्यम से अभियोजन स्वीकृति देने के लिए निर्देशित करें। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संविधान में सभी नागरिक समान हैं। पद के कारण किसी को विशेष संरक्षण नहीं मिल सकता। अगर सरकार अभियोजन स्वीकृति नहीं देती है तो यह माना जाएगा कि सरकार दोषी को बचाना चाहती है।
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