शिवम मिश्रा, रायपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास में कई ऐसी हाईप्रोफाइल घटनाएं हुईं, जिनकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, लेकिन वर्षों बाद भी अधिकांश मामलों में या तो जांच अधूरी है या फिर उसके परिणाम ऐसे नहीं रहे, जिनसे पीड़ित परिवारों को संतुष्टी नहीं मिली। प्रदेश में सीबीआई के कुछ एक को छोड़कर अधिकतर मामले पेंडिंग हैं, जिनमें पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड, पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड, बिरनपुर हिंसा, कलर डॉपलर घोटाला और महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप जैसे कई चर्चित मामले शामिल हैं। कुछ मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुए, कुछ में प्रभावशाली लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन कई मामलों में दोषसिद्धि नहीं हो सकी या अंतिम न्यायिक परिणाम अब तक सामने नहीं आया है।

राज्य में CBI की जांच की आंच कई प्रभावशाली नेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों, कारोबारियों और अधिकारियों तक जरूर पहुंची, लेकिन कई मामलों में अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके। कई जांचें लंबे समय तक खिंचती रहीं और कुछ मामलों में आज भी अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में CBI जांच की प्रभावशीलता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में कोरिया जिले के चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच राज्य सरकार ने CBI को सौंप दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश में एक बार फिर CBI जांच को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर कोरिया तिहरे हत्याकांड की CBI जांच पर टिकी है।

छत्तीसगढ़ गठन के बाद कितने हाईप्रोफ़ाइल मामलो में CBI जांच कर चुकी है या जांच पेंडिंग है, आइए जानते हैं।

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छत्तीसगढ़ में 2000 से 2003 तक जोगी सरकार में CBI जांच

छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर 2000 से 6 दिसंबर 2003 तक अजीत जोगी की सरकार रही। इस 3 साल के कार्यकाल में CBI ने राज्य में दो मुख्य हाइप्रोफाइल मामलो की जांच की है, जिसमे “ब्लैक सी” जाली नोट से जुड़ा एक मामला और दूसरा बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड से जुड़ा मामला था।

1. “ब्लैक सी” जाली नोट से जुड़ा मामला

“Black Sea” IB नोट/जाली दस्तावेज केस में 2 अप्रैल 2003 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू की थी। जानकारी के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री जोगी ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को IB का जाली “Black Sea” नोट भेजा, जिसमें IB स्पेशल डायरेक्टर के फर्जी सिग्नेचर थे। CBI ने कैबिनेट सेक्रेटेरिएट की शिकायत पर केस दर्ज किया। इस दौरान जोगी पर “जाली नोट के इस्तेमाल” का आरोप भी लगा। अजीत जोगी के सीएम रहते हुए CBI ने चार्जशीट दाखिल की। छत्तीसगढ़ के पहले CM के खिलाफ CBI चार्जशीट का ये पहला मामला था। इस प्रोफ्राफाइल मामले की सुनवाई सालों तक चली, लेकिन इसका कोई निर्णय अब तक नहीं आ सका।

2. बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामला

छत्तीसगढ़ का दूसरा बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया था। NCP नेता रामअवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हाईप्रोफाइल केस की जांच शुरू में राज्य पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद दिसंबर 2003 में केस CBI को सौंपा गया था। CBI ने अमित जोगी समेत कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 लोगों को सजा दी, इस दौरान अमित जोगी को बरी किया गया। इसके बाद 2026 में HC ने CBI अपील मंजूर कर अमित जोगी को उम्रकैद दी, लेकिन फिर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है।

2004 से 2018 तक रमन सरकार में सीबीआई जांच

राज्य में साल 2004 से 2018 तक डॉ. रमन सिंह की सरकार में कई मामलो की CBI जांच शुरू की गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कलर डॉपलर घोटाला, ताड़मेटला और सुकमा आदिवासी गांवो में 2011 में आगजनी, सेक्स सीडी कांड, झीरमकांड जैसे आधा दर्जन से अधिक हाइप्रोफाइल मामले शामिल हैं।

1. पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड, अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं

छत्तीसगढ़ में साल 2010 में बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया था। मामले की सीबीआई जांच वर्षों तक चलने के बावजूद किसी निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, सीबीआई हत्या के आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और न्यायालय में टिकने योग्य साक्ष्य जुटाने में सफल नहीं रही। मामले को लेकर लंबे समय से पत्रकार संगठनों और परिजनों ने निष्पक्ष जांच तथा दोषियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, सीबीआई की जांच से हत्या के अपराधियों की पहचान या दोष सिद्ध नहीं हो सका और आज तक किसी को इस हत्या में सजा नहीं मिली है।

2. पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड, परिवार को नहीं मिला इंसाफ

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद (छुरा) में साल 2011 में पत्रकार उमेश राजपूत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश पर पाँच साल बाद 2015 में यह केस सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की। वर्ष 2016 में दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की, लेकिन उनके खिलाफ हत्या का आरोप सिद्ध करने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके। सीबीआई ने तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाने के प्रयास किए, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार एजेंसी किसी भी आरोपी के खिलाफ ऐसा ठोस साक्ष्य एकत्र नहीं कर सकी, जिसके आधार पर हत्या का सफल अभियोजन चलाया जा सके। मामले में किसी आरोपी को दोषी ठहराने वाला अंतिम न्यायिक निर्णय भी अब तक सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार अब भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है।

3. कलर डॉपलर घोटाला (2010), अब तक नहीं आया CBI जांच का परिणाम

छत्तीसगढ़ में साल 2010 के समय स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल उपकरण और दवा खरीदी में बड़ा घोटाला सामने आया था। इसे कलर डोपलर घोटाला का नाम दिया गया था। इस घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने की। जांच में स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और उपकरण आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप पाए गए। CBI ने मामले में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर कई अधिकारियों को आरोपी बनाया।

जांच के अनुसार, वर्ष 2006-07 के दौरान सरकारी अस्पतालों के लिए कलर डॉपलर मशीनों और अन्य चिकित्सा उपकरणों की खरीद में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप था कि मूल निर्माता कंपनी के नाम से मिलते-जुलते नाम वाली फर्जी फर्म के माध्यम से चीन निर्मित निम्न गुणवत्ता के उपकरण खरीदे गए, जबकि भुगतान उच्च गुणवत्ता वाले आयातित उपकरणों के नाम पर किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि खरीदी गई कई मशीनें एक वर्ष के भीतर खराब हो गईं, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ।

CBI ने जांच के दौरान तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक डॉ. बी.के. सार्वा, पूर्व स्वास्थ्य संचालक डॉ. डी.के. सेन, तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक डॉ. प्रमोद सिंह सहित अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका की जांच की। एजेंसी ने छापेमारी कर दस्तावेज जब्त किए और आरोपपत्र में सरकारी धन के दुरुपयोग तथा मिलीभगत का आरोप लगाया। हालांकि, लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बावजूद इस मामले में अब तक ऐसा कोई अंतिम न्यायिक फैसला सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जिसमें सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध होकर सजा सुनाई गई हो। यानी CBI जांच का परिणाम आरोपपत्र दाखिल होने और अभियोजन शुरू होने तक सीमित रहा, जबकि अंतिम दोषसिद्धि का निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

4. ताड़मेटला और सुकमा आदिवासी गांवों में आगजनी (2011)

साल 2011 में सुकमा जिले के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुरम गांवों में नक्सल विरोधी अभियान (सलवा जुडूम के समय) के दौरान आदिवासियों के सैकड़ों घरों को जलाने, हत्या और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच सीबीआई को सौंपी थी। इस बहुचर्चित मामले पर सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर 2016 में सुप्रीम कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट और चार्जशीट पेश की थी। इस मामले में सीबीआई ने कई स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (SPOs) और स्थानीय कप्तानों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। यह मामला आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।

5. बहुचर्चित कथित सेक्स सीडी कांड (2017) मामला

छत्तीसगढ़ की राजनीति में सबसे बड़ा भूचाल वर्ष 2017 में एक कथित अश्लील सीडी वायरल होने पर आया था, जिसमें राज्य के एक तत्कालीन कद्दावर मंत्री का नाम उछाला गया था। इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिज्ञों के खिलाफ रायपुर के पंडरी थाने में आईटी एक्ट और जबरन वसूली का मामला दर्ज हुआ था। तत्कालीन भाजपा सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने दिसंबर 2017 में इस केस को हाथ में लिया और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व विनोद वर्मा सहित अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पूरे मामले में लंबे समय तक चली अदालती कार्यवाही के बाद मार्च 2025 में सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल को इस मामले में बरी कर दिया, क्योंकि उनके खिलाफ अभियोजन का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया था, लेकिन सीबीआई की अपील के बाद पूरे प्रकरण को कोर्ट के निर्देश पर पूरे मामले को दोबारा खोला गया है।

2019 में छत्तीसगढ़ सरकार ने CBI को “सामान्य सहमति” वापस ले ली थी इसलिए 2019-2023 के बीच CBI नए केस तभी दर्ज कर पाई जब कोर्ट का आदेश या राज्य सरकार की केस-बाय-केस अनुमति मिली। 2024 में बीजेपी सरकार बनने के बाद सहमति फिर बहाल हुई।

छत्तीसगढ़ से जुड़े बड़े CBI मामले और परिणाम

CGPSC भर्ती घोटाला 2020-2022

2024 में राज्य सरकार के अनुरोध पर सीजीपीएससी भर्ती घोटाला 2020-22 मामला सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव सहित अन्य अधिकारियों ने मिलीभगत कर अपने बेटे-बेटियों व रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य प्रमुख पदों पर भर्ती किया। सीबीआई ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर 2000 पन्नों से अधिक की चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी है। सितंबर 2025 तक 5 बड़े अफसर/रिश्तेदार गिरफ्तार हुए हैं। मामले की अभी जांच जारी है।

महादेव सट्टा ऐप केस

राज्य सरकार ने महादेव बुक ऑनलाइन सट्टा ऐप केस भी CBI को ट्रांसफर किया है। इस मामले को लेकर CBI ने छत्तीसगढ़, भोपाल, कोलकाता, दिल्ली में 60 जगह छापे मारे। पूर्व एसपी अभिषेक पल्लव, प्रशांत अग्रवाल समेत कई अफसरों के घर तलाशी ली गई, जिसमें डिजिटल साक्ष्य मिले। मामले की सीबीआई जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग (सट्टा) ऐप मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथ में है। राज्य सरकार ने अगस्त 2024 में इस प्रकरण से जुड़े राज्य में दर्ज सभी मामलों को सीबीआई को सौंपने की अनुशंसा की थी। इसके बाद जनवरी 2025 में सीबीआई ने छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से केस डायरी और अन्य अभिलेख अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

प्रकरण में राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज 70 मामलों तथा EOW में दर्ज एक मामले सहित कुल 71 प्रकरण सीबीआई को हस्तांतरित किए गए हैं। सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद ईओडब्ल्यू द्वारा दाखिल तीन आरोपपत्रों सहित सभी दस्तावेजों का परीक्षण शुरू किया। एजेंसी अब ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क, हवाला लेनदेन, मनी ट्रेल, सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक व्यक्तियों तथा अन्य आरोपितों की भूमिका की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। मार्च 2025 में सीबीआई ने जांच के सिलसिले में छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी भी की। कार्रवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर और भिलाई स्थित परिसरों सहित कई अन्य ठिकानों पर तलाशी ली गई। सीबीआई ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों के आधार पर की गई।

महादेव सट्टा ऐप मामले में सीबीआई की जांच अभी जारी है। अब तक एजेंसी ने इस प्रकरण में कोई अंतिम जांच रिपोर्ट या ऐसा निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे मामले का अंतिम परिणाम माना जा सके। दूसरी ओर, Enforcement Directorate (ईडी) धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलू की अलग से जांच कर रही है और इस मामले में करोड़ों रुपये की संपत्तियां कुर्क करने सहित कई कार्रवाई कर चुकी है।

बेमेतरा बिरनपुर हिंसा

8 अप्रैल 2023 को बिरनपुर गांव में दो स्कूली बच्चों के बीच हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों के परिजन आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते तनाव बढ़ा और दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। पथराव और मारपीट में 22 वर्षीय भुनेश्वर साहू की मौत हो गई, जबकि पुलिसकर्मी भी घायल हुए। वहीं 10 अप्रैल 2023 को विश्व हिंदू परिषद के बंद के दौरान गांव और आसपास तनाव बना रहा। इसी दौरान आगजनी की घटनाएं हुईं। अगले दिन बिरनपुर निवासी रहीम मोहम्मद (55) और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) के शव गांव से कुछ दूरी पर मिले। दोनों की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। इस घटना के बाद पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई तथा कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद अप्रैल 2024 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

बिरनपुर (बेमेतरा) हिंसा और भुवनेश्वर साहू हत्याकांड की सीबीआई जांच के बाद अक्टूबर 2025 में विशेष अदालत में चार्जशीट पेश की गई, जिसमें इस घटना को राजनीतिक साजिश मानने से इनकार किया गया है। चार्जशीट के अनुसार, यह विवाद बच्चों के बीच सामान्य झगड़े से शुरू होकर परिवारों और समुदायों के बीच फैला था। सीबीआई की चार्जशीट में स्पष्ट किया गया कि बिरनपुर हिंसा कोई पूर्व नियोजित राजनीतिक षड्यंत्र नहीं था। सीबीआई की चार्जशीट में छह नए आरोपियों को भी शामिल किया गया। एजेंसी ने अपने साक्ष्यों के आधार पर हत्या, दंगा और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत अभियोजन की कार्रवाई की। हालांकि जांच के दौरान जिन कुछ लोगों के नाम सार्वजनिक बहस में सामने आए थे, उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया।

इस बीच, बिरनपुर हिंसा से जुड़े रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद (पिता-पुत्र) की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने करीब तीन वर्ष की सुनवाई के बाद साक्ष्यों के अभाव में सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। वहीं भुनेश्वर साहू हत्याकांड में सीबीआई अदालत में न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

दिव्यांग कल्याण फंड गबन मामला

दिव्यांग कल्याण फंड गबन मामले की जांच में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य में 2004-2012 के बीच हुए कथित 1,000 करोड़ के एनजीओ घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया है। स्थानीय पुलिस व एजेंसियों की जांच पर संदेह जताते हुए अदालत ने इसे “संगठित भ्रष्टाचार” का मामला माना है। मामले की सीबीआई जांच जारी है। CBI के अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच की जाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस घोटाले में एक मंत्री और 7 IAS समेत कुल 14 लोगों का नाम आया है।

वरिष्ठ IAS अधिकारी बीएल अग्रवाल रिश्वत कांड

छत्तीसगढ़ कैडर के 1998 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बीएल अग्रवाल से जुड़े चर्चित रिश्वत कांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच का अंतिम परिणाम अभियोजन के पक्ष में नहीं रहा। सीबीआई ने वर्ष 2017 में आरोप लगाया था कि बीएल अग्रवाल ने अपने खिलाफ चल रही सीबीआई जांच को प्रभावित करने और राहत पाने के लिए कथित तौर पर 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की साजिश रची थी। एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर विशेष अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।

सीबीआई के अनुसार, अग्रवाल ने कथित बिचौलिए भगवान सिंह और स्वयं को प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा बताने वाले सैयद बुरहानुद्दीन के माध्यम से जांच सेटल कराने की कोशिश की। आरोप था कि 60 लाख रुपये हवाला के जरिए भेजे गए तथा शेष राशि के बदले सोना देने पर भी सहमति बनी थी। इसी आधार पर सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों के अनुसार, विशेष अदालत ने बीएल अग्रवाल सहित आरोपियों को इस रिश्वत कांड में आरोपों से बरी कर दिया। इस प्रकार सीबीआई की जांच और अभियोजन के बावजूद मामले में दोषसिद्धि नहीं हो सकी।

कोरिया तिहरे हत्याकांड की होगी CBI जांच

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चर्चित नौगई (कटगोड़ी) तिहरे हत्याकांड की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। 30 जून को छत्तीसगढ़ सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा-6 के तहत मामले की जांच के लिए सीबीआई को सहमति प्रदान कर दी है। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, थाना सोनहत में दर्ज अपराध क्रमांक 65/2026 और 66/2026 की जांच अब सीबीआई करेगी। इसके लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों के अधिकार क्षेत्र का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में कर दिया गया है।

बता दें कि कोरिया जिले के ग्राम कटगोड़ी में 16-17 जून की दरम्यानी रात यह सनसनीखेज घटना हुई थी। भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह अपने साथियों के साथ फॉर्च्यूनर वाहन में सवार थे। आरोप है कि हमलावरों ने पुराने विवाद को सुलझाने के बहाने तीनों को बुलाया और उन पर हमला कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी को घेरकर उसमें पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस घटना में भरत सिंह गहरवार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके दो साथी वीरेंद्र सिंह उर्फ वीरू और नागेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

मामले में कार्रवाई करते हुए कोरिया पुलिस ने तिहरे हत्याकांड के सभी 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच रेत उत्खनन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर सुलह के बहाने बुलाकर वारदात को अंजाम दिया। मामले में मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी समेत अमन त्रिपाठी, आशुतोष त्रिपाठी और निशांत त्रिपाठी ने पूर्व में मनेंद्रगढ़ कोतवाली में आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा अक्षय त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और मन्नू त्रिपाठी सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

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