​Automobile Desk : अगर आप नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह निर्णय जल्द लेना फायदेमंद साबित हो सकता है। आगामी त्योहारी सीजन से पहले देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां गाड़ियों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसका मुख्य कारण गाड़ियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कच्चे माल की लागत में हुई तेज बढ़ोतरी है। स्टील, रबर, कॉपर और एल्युमिनियम जैसे कमोडिटी के दाम अचानक उछलने से ऑटो सेक्टर का मार्जिन प्रभावित हो रहा है।

​भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए FY27 की शुरुआत मांग के लिहाज से काफी सकारात्मक रही है। पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में अच्छी रफ्तार देखने को मिली है। हालांकि, निर्माण लागत में लगातार हो रहे इजाफे ने कंपनियों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अब कंपनियों के पास केवल दो ही रास्ते बचते हैं—या तो वे इस अतिरिक्त लागत का बोझ खुद उठाकर अपना मुनाफा कम करें, या फिर इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर डालते हुए कीमतें बढ़ाएं।

​व्यावसायिक वाहन क्षेत्र के प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि गाड़ियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामानों में अकेले स्टील की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत होती है। आयात शुल्क और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के चलते फिलहाल स्टील के दामों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। इसके अलावा, रबर, एल्युमिनियम और तांबे की दरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के बढ़ते निर्माण के कारण तांबे की मांग में काफी तेजी आई है, जिससे इसकी कीमतें भी आसमान छू रही हैं।

​लागत का यह बढ़ता दबाव केवल वाहन निर्माताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों और टायर उद्योग पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। कंपोनेंट निर्माताओं के अनुसार, हाल के महीनों में बिजली, परिवहन और श्रम लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके चलते टायर निर्माताओं ने पहले ही दरों में संशोधन करना शुरू कर दिया है और आने वाले समय में और बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

​आंकड़ों की बात करें तो बीते कुछ महीनों के भीतर प्राकृतिक रबर की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक, स्टील में 20 प्रतिशत से ज्यादा और तांबे के दामों में लगभग 10 प्रतिशत तक का उछाल आया है। यही वजह है कि मारुति सुजुकी और होंडा जैसी बड़ी कंपनियों ने हाल ही में अपने चुनिंदा मॉडल्स की दरों में वृद्धि की है, जबकि कई अन्य दिग्गज कंपनियां आने वाले दिनों में नई दरें लागू करने पर विचार कर रही हैं। कुछ कंपनियां फिलहाल अपनी आंतरिक लागतों को नियंत्रित करके मूल्य वृद्धि को टालने की कोशिश में जुटी हैं, लेकिन लंबे समय तक इस स्थिति को संभाल पाना मुमकिन नहीं दिखता।

​भारत में त्योहारी सीजन ऑटो उद्योग के लिए सबसे अहम व्यापारिक समय माना जाता है, जब गाड़ियों की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की जाती है। ऐसे में अगर कंपनियां दरों में बढ़ोतरी करती हैं, तो इसका सीधा असर ग्राहकों की निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। फिलहाल कंपनियां लागत प्रबंधन और सीमित मूल्य वृद्धि का संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कच्चे माल के रुख को देखते हुए आने वाले हफ्तों में गाड़ियों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।