पवन राय, मंडला। आस्था, शांति और विश्वास की नगरी। जहां हर सुबह मां नर्मदा के जयकारों से होती है। जहां दूर-दूर से लोग इस पवित्र धारा के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन आज इसी पवित्र नगरी से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो न सिर्फ हैरान करती है, बल्कि कई बड़े सवाल भी खड़े करती है। क्योंकि मां नर्मदा के आंचल के आसपास अब आस्था नहीं, बल्कि शराब का अवैध कारोबार पनप रहा है।
घोषणा सिर्फ फाइलों और कागजों में
जी हां, वही नर्मदा तट जहां कभी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा था कि नर्मदा किनारे से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। मकसद साफ था, आस्था की पवित्रता बनी रहे, मां नर्मदा का सम्मान सुरक्षित रहे।लेकिन आज वो फैसला, वो घोषणा सिर्फ फाइलों और कागजों में सिमट कर रह गई है। जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
अवैध कारोबार करने वालों के लिए सब कुछ
नगर के पान ठेले, छोटे-छोटे किराना स्टोर, होटल और ढाबे, हर जगह शराब खुलेआम बेची जा रही है। लोगों को बैठाकर पिलाई जा रही है। सब कुछ इतनी बेखौफी से हो रहा है जैसे कोई कानून ही न हो, जैसे किसी का कोई डर ही न हो। अब सवाल ये है, क्या प्रशासन को ये सब दिखाई नहीं दे रहा? या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है? क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं और अवैध कारोबार करने वालों के लिए सब कुछ खुला छोड़ दिया गया है।
मां के आंचल में शराब का जहर
सबसे बड़ी बात, ये सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं है, ये आस्था के साथ खिलवाड़ है। मां नर्मदा, जिन्हें जीवनदायिनी कहा जाता है, जिनकी पूजा की जाती है, जिनके किनारे लोग मोक्ष की कामना लेकर आते हैं, क्या उनके आंचल के पास अब शराब का ये जहर परोसा जाएगा?
सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे बैठे
स्थानीय लोगों की मानें तो ये धंधा लंबे समय से चल रहा है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही होती हैं। कभी-कभार छापेमारी, कुछ बोतलें जब्त, और फिर सब कुछ पहले जैसा। तो क्या ये मान लिया जाए कि अवैध शराब माफिया के हौसले बुलंद हैं? या फिर सिस्टम कहीं न कहीं कमजोर पड़ चुका है? और अगर ऐसा है तो जिम्मेदारी किसकी है? प्रशासन की, स्थानीय पुलिस की, या फिर उन लोगों की जो सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे बैठे हैं?
ये आस्था, कानून और व्यवस्था, तीनों की परीक्षा
आज जरूरत है सिर्फ खबर दिखाने की नहीं, बल्कि कार्रवाई की। उन वादों को जमीन पर उतारने की जो कभी मंचों से किए गए थे। क्योंकि अगर आज भी ये अवैध कारोबार यूं ही चलता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब आस्था की ये नगरी अपनी पहचान खोने लगेगी। मां नर्मदा का आंचल, जिसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, वो सवालों के घेरे में आ जाएगा। अब देखना ये होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन जागता है या फिर सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा। क्योंकि ये सिर्फ एक खबर नहीं है, ये आस्था, कानून और व्यवस्था, तीनों की परीक्षा है।
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