भुवनेश्वर: ओडिशा के प्रशासनिक और पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त (DCP) जगमोहन मीणा के अचानक इस्तीफा देने के महज कुछ ही दिनों के भीतर, राज्य कैडर के एक और युवा आईपीएस (IPS) अधिकारी ने अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया है. एक के बाद एक दो होनहार अफसरों के सरकारी नौकरी छोड़ने के इस फैसले ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है.

कौन हैं इस्तीफा देने वाले दूसरे युवा IPS अधिकारी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओडिशा कैडर के 2025 बैच के प्रोबेशनर अधिकारी सी ए रामदास (चौधरी अभिजीत रामदास) ने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया है. मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले 33 वर्षीय रामदास ने पिछले साल ही प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) पास की थी, जिसके बाद उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित किया गया था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रामदास वर्तमान में हैदराबाद स्थित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी’ (SVPNPA) में अपनी बुनियादी ट्रेनिंग ले रहे हैं. वह अभी अपने प्रशिक्षण के पहले चरण में ही हैं और उन्होंने अभी तक ओडिशा में अपनी मैदानी तैनाती (फील्ड ड्यूटी) की शुरुआत भी नहीं की थी.

DGP वाई बी खुरानिया का बयान

ट्रेनी आईपीएस अधिकारी के इस तरह अचानक इस्तीफा देने के पीछे की वजहों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. इस मामले पर ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) वाई बी खुरानिया ने मीडिया को बताया, “हमें सी ए रामदास का इस्तीफा पत्र प्राप्त हो गया है. चूंकि वह अभी प्रशिक्षण ले रहे हैं, इसलिए उन्होंने ओडिशा में कोई फील्ड ट्रेनिंग पूरी नहीं की थी. उनके इस फैसले के पीछे की वास्तविक वजहें फिलहाल हमें स्पष्ट नहीं हैं.”

एक ही हफ्ते में दो बड़े इस्तीफों से उठे सवाल

इस घटनाक्रम ने इसलिए तूल पकड़ लिया है क्योंकि महज कुछ दिन पहले ही 2013 बैच के एक अनुभवी आईपीएस अधिकारी और भुवनेश्वर के मौजूदा डीसीपी जगमोहन मीणा ने अखिल भारतीय सेवाओं (AIS) से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. मीणा ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को अपना इस्तीफा सौंपा था.

एक ही हफ्ते के भीतर दो युवा और ऊर्जावान आईपीएस अधिकारियों द्वारा नौकरी छोड़ना बेहद असामान्य माना जा रहा है. सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में बैक-टू-बैक दो इस्तीफों का आना पुलिस महकमे के भीतर आंतरिक तनाव या कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है. जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार को इन दोनों ही मामलों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि युवा अधिकारियों के बीच बढ़ रहे इस असंतोष की सही वजह का पता चल सके.