Stocks to Buy Details: भारत का लगेज इंडस्ट्री अब सस्टेनेबल रिकवरी के दौर में प्रवेश कर रहा है. 2023 से 2028 के बीच इस सेक्टर के 12 प्रतिशत के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने और लगभग 36,000 करोड़ रुपये के आकार तक पहुंचने की उम्मीद है. यह अनुमान ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल की हालिया रिपोर्ट में दिया गया है.
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यह सेक्टर हाल ही में खबरों में भी रहा है, क्योंकि VIP इंडस्ट्रीज के प्रमोटर्स ने कंपनी में 32 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट इक्विटी फर्म मल्टीपल्स को बेचने का सौदा पूरा किया है. इस ट्रांजैक्शन से लगेज इंडस्ट्री में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ी है.
एलारा कैपिटल का मानना है कि लगेज सेगमेंट में ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 2024 में 54 प्रतिशत से बढ़कर 2027 तक 60 प्रतिशत हो सकती है. इसकी वजह किफायती और प्रीमियम दोनों सेगमेंट में फंक्शनैलिटी बेस्ड प्रोडक्ट्स की तेजी से बढ़ती मांग है.
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बढ़ते कॉम्पिटिशन से बदला इंडस्ट्री का माहौल
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इस इंडस्ट्री में मुकाबला मुख्य रूप से VIP इंडस्ट्रीज, सैमसोनाइट और सफारी इंडस्ट्रीज तक सीमित था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है.
कई डिजिटल-ओनली ब्रांड, प्राइवेट लेबल और D2C यानी डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर कंपनियों ने तेजी से विस्तार किया है. हालांकि एलारा का कहना है कि ऑफलाइन पहुंच की कमी और कस्टमर एक्विजिशन की ऊंची लागत के कारण D2C कंपनियां अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पा रही हैं.
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सफारी और VIP इंडस्ट्रीज क्यों हैं मजबूत दावेदार
एलारा कैपिटल के अनुसार, सफारी इंडस्ट्रीज और VIP इंडस्ट्रीज दोनों ही क्षमता विस्तार, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और सख्त लागत नियंत्रण से फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में हैं.
पिछले पांच साल के प्रदर्शन को देखें तो सफारी इंडस्ट्रीज ने VIP इंडस्ट्रीज से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है. इस दौरान सफारी के शेयरों ने 54 प्रतिशत CAGR से रिटर्न दिया है, जबकि VIP इंडस्ट्रीज के शेयरों में सिर्फ 2.5 प्रतिशत CAGR की बढ़त रही है.
बिक्री के मामले में भी सफारी आगे रही है. पिछले पांच साल में इसकी बिक्री 21 प्रतिशत CAGR से बढ़ी है, जबकि VIP की बिक्री सिर्फ 5 प्रतिशत CAGR से बढ़ी. इस दौरान सफारी का EPS भी 35 प्रतिशत CAGR से बढ़ा है.
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VIP इंडस्ट्रीज के लिए चुनौती बना हुआ समय
VIP इंडस्ट्रीज का मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन दबाव में है. चालू वित्त वर्ष के पहले हाफ में कंपनी ने 156 करोड़ रुपये का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि FY25 में यह लॉस 69 करोड़ रुपये था.
एलारा कैपिटल के मुताबिक VIP इस समय रीस्ट्रक्चरिंग और स्टेबलाइजेशन के दौर से गुजर रही है. हाल ही में हुए ओनरशिप ट्रांजिशन से कंपनी में बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नए सिरे से फोकस आने की उम्मीद है.
हालांकि एलारा का कहना है कि VIP इंडस्ट्रीज की रिकवरी तभी संभव है, जब कंपनी लगातार परफॉर्मेंस में सुधार करे, मार्जिन बढ़ाए और खोया हुआ मार्केट शेयर वापस हासिल करे. रिपोर्ट में कहा गया है कि टर्नअराउंड की संभावना से शेयर की वैल्यू बढ़ सकती है. रिस्क-रिवॉर्ड के लिहाज से VIP में री-रेटिंग की गुंजाइश बनी हुई है.
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अभी भी बने हुए हैं बड़े जोखिम
एलारा ने VIP इंडस्ट्रीज के लिए कुछ जोखिम भी गिनाए हैं. इनमें बढ़ता कॉम्पिटिशन, इनपुट कॉस्ट में तेजी और कंज्यूमर डिमांड के बदलाव को समय पर न समझ पाना शामिल है.
टारगेट प्राइस और शेयर की स्थिति (Stocks to Buy)
ब्रोकरेज ने सफारी इंडस्ट्रीज के लिए 3,111 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो अब तक का इसका सबसे ऊंचा टारगेट है. मौजूदा स्तर से इसमें करीब 37 प्रतिशत तक की तेजी की संभावना है. वहीं VIP इंडस्ट्रीज के लिए 430 रुपये का टारगेट प्राइस दिया गया है, जिसमें मौजूदा स्तर से करीब 9 प्रतिशत तक की बढ़त संभव है.
2025 में अब तक सफारी इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 14 प्रतिशत टूट चुके हैं, जबकि VIP इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके बावजूद एलारा कैपिटल का मानना है कि सेक्टर की लॉन्ग टर्म रिकवरी की थीम बरकरार है और आगे चलकर चुनिंदा कंपनियों में अच्छे मौके मिल सकते हैं.

