शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पिछले कई सालों से ठप पड़ी छात्र राजनीति को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को दो टूक कहा कि अगर चुनाव नहीं होंगे तो नए नेता कहां से आएंगे? 

कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि वह आगामी दो सप्ताह में नए सत्र का अकादमिक कैलेंडर पेश करे, जिसमें चुनाव कराने की समय-सीमा साफ तौर पर तय हो। इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी। हाईकोर्ट के इस कड़े निर्देश के बाद राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

मामले को लेकर एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश में लगभग 10 साल से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। आखिरी बार साल 2017 में चुनाव हुए थे, लेकिन जिस तरह से सालों से छात्र संघ चुनाव बंद हैं, वह निंदनीय है। पहले सरकार ने कोरोना का बहाना लिया, फिर नई शिक्षा नीति का बहाना किया, लेकिन सरकार आखिर कब तक बहानेबाजी करती रहेगी? 

कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 2 सप्ताह के अंदर चुनाव का कैलेंडर जारी करने को कहा है। सुनवाई के दौरान सरकार ने इस याचिका को निरस्त करने का आग्रह भी किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी एक नहीं सुनी। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सरकार तत्काल छात्र संघ चुनाव की घोषणा करे और कैलेंडर जारी करे। 

कोर्ट ने यह भी सही कहा कि अगर चुनाव नहीं होंगे तो भविष्य में प्रतिभावान छात्र नेता कैसे आएंगे? सरकार को चुनाव करवाने ही चाहिए। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश छात्र संघ के आगामी परिणामों से सरकार डरी हुई है, जबकि NSUI इसके लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार है। सरकार जानती है कि छात्र संघ का चुनाव का असर भी सीधे तौर पर प्रदेश की राजनीति में पड़ता है।

प्रत्यक्ष प्रणाली से तुरंत हों चुनाव, हमने किए कई आंदोलन – ABVP

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवम जाट ने भी कोर्ट के रुख की सराहना की और प्रत्यक्ष प्रणाली की मांग दोहराई। उन्होंने कहा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का स्पष्ट मानना है कि छात्र संघ चुनाव जल्द से जल्द होने चाहिए। हम इसके लिए लगातार मांग कर रहे हैं। हमारी स्पष्ट मांग है कि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही होने चाहिए। इस मांग को लेकर हमने कई बार सरकार को घेरा है, बड़े आंदोलन किए हैं और ज्ञापन भी सौंपे हैं। छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार के लिए प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराना बेहद जरूरी है।

राजनीति की प्राथमिक पाठशाला हैं छात्रसंघ चुनाव – सांसद आलोक शर्मा

छात्र राजनीति की बहाली का समर्थन करते हुए भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश समेत देश के कई वरिष्ठ नेताओं का उदय छात्र राजनीति के माध्यम से ही हुआ है। छात्र संघ के माध्यम से ही देश-प्रदेश को अच्छे और योग्य लीडर मिलते हैं। छात्र राजनीति असल में लोकतंत्र और राजनीति की प्राथमिक पाठशाला होती है। इसलिए छात्र संघ के चुनाव निश्चित रूप से होने चाहिए। जैसे नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के लोकतांत्रिक चुनाव नियमित रूप से होते हैं, वैसे ही कॉलेजों में भी प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होने चाहिए। न्यायालय ने जो आदेश और निर्देश दिए हैं, उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

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