कुंदन कुमार, पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, विशेष निगरानी इकाई यानी SVU और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं कि आखिर क्यों कुछ मामलों में कार्रवाई छोटे अधिकारियों तक सीमित दिख रही है? क्या बड़े नाम जांच के दायरे से बाहर हैं?राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं।

SVU की कार्यप्रणाली पर उठाया सवाल

विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि कुछ जांच दस्तावेजों और प्रतिवेदन में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए, उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने विशेष निगरानी इकाई यानी SVU की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं और पूछा है कि आखिर जांच एजेंसियां किन मानकों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं? उन्होंने कहा, “छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन जिन बड़े अधिकारियों के नाम दस्तावेजों में हैं, उनके खिलाफ अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

BSEB के कामकाज को लेकर भी उठाया सवाल

सुधाकर सिंह ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी BSEB के कामकाज को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2017 के बाद समिति के वित्तीय प्रबंधन, परीक्षा संचालन, संविदा नियुक्तियों और तकनीकी कंपनियों को दिए गए ठेकों की स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग की गई है।

सांसद ने पूछा है कि करोड़ों रुपये के खर्च, अनुबंधों और भुगतान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए? सुधाकर सिंह ने परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी कंपनियों, बायोमेट्रिक व्यवस्था और तकनीकी सेवाओं के आवंटन को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की गई है। सवाल यह भी उठाया गया है कि क्या इन सभी मामलों की कभी स्वतंत्र एजेंसियों से समीक्षा कराई गई और यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या वजह रही?

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